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सूखा पीड़ित किसानों के साथ सरकारों का राहत के नाम पर किया जाने वाला मजाक कोई नई बात नहीं हैं. मुआवजे के नाम पर किसानों के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा हैं. ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा में सामने आया हैं.

खैरभवना के एक किसान के ढाई एकड़ खेत मेंं लगी धान फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी, पर उसे महज 18 रुपए बतौर मुआवजा दिया गया है. एक किसान को तो मुआवजा के नाम पर उसके बैंक खाते में 40 पैसा जमा कराया गया है. 80 फीसदी किसानों को तीन अंकों में ही बीमा फसल राशि मिली यानि 1000 का आंकड़ा भी पार नहीं हो सका है.

रभवना के ही भैयालाल की करीब 3 एकड़ मेंं लगी धान की पुसल लगभग पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी. बीमा भुगतान के तौर पर भैयालाल को 301 रुपए का भुगतान हुआ हैं. रंगबेल निवासी किसान दिलराज सिंह के पास 5.144 हेक्टेयर जमीन है पर उसे केवल 40 पैसे का ही मुआवजा दिया गया हैं.

बीमा कंपनी से प्राप्त क्षतिपूर्ति राशि बैंक द्वारा समितियों को प्रेषित किया गया है. 90 फीसदी किसानों के खाते में बीमा राशि का भुगतान किया जा चुका है. किस आधार पर मुआवजा तैयार किया गया है यह देखने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है. – वीरेंद्र बहादुर पंचभाई, एसडीएम कटघोरा


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