कन्हैया के खौफ के कारण पाठ्यक्रम से कई अंतर्राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों को हटा दिया गया है, उनकी जगह नए महापुरुषों को जोड़ा जा रहा है

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार भले ही अभी आरोपों के ही घेरे में हों, उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं पेश किया जा सका हो लेकिन उन्हें दोषी मानने वालों की कमी नहीं है। गुनाह साबित होने से पहले ही कुछ लोगों को कन्हैया से इतनी नफरत है कि वो इस बात का इंतजाम करने में लगे हैं कि कभी कोई कन्हैया पैदा ही ना हो।

राजस्थान के शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी कन्हैया का नाम भी सुनना नहीं चाहते। वो बच्चों की सोच को इस तरह से गढ़ना चाहते हैं कि बड़े होकर वो वैसा ही सोचें जैसा कि वो चाहते हैं। इसके लिए वो राज्य सरकार के स्कूलों में पाठ्यक्रम में बदलाव करने में लगे हैं। उन्होंने राजस्थान विधानसभा में बयान दिया कि पाठयक्रम में विशेष सुधार किया जाएगा ताकि प्रदेश में कोई कन्हैया पैदा नहीं हो।

शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी का विशेष ज़ोर बच्चों में देशप्रेम और देशभक्ति की भावना पर है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति की भावना पैदा हो इसके लिए शिक्षा पाठयक्रम में विशेष बदलाव किया जा रहा है।

वो इसके लिए पाठ्यक्रम में आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता सैनानियों की जीवनियों को शामिल करवा रहे हैं।वासुदेव देवनानी कहते हैं कि बच्चों के पाठ्यक्रम में हेमू कलानी, संत कंवर राम, महाराजा धारसेन और स्वामी तौरम की जीवनी शामिल की जाएगी (indiatrendingnow)


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