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जयपुर। राजस्थान में दलित उत्पीड़न का एक और कथित मामला सामने आया है। यहां किशनगढ के पास स्थित केन्द्रीय विश्वविद्यालय के एक दलित छात्र ने स्वयं को विश्वविद्यालय से निकाले जाने पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इस मामले में स्थानीय कोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय के कुलपति सहित सात शिक्षकों पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस मामले में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने भी विश्वविद्यालय से रिपोर्ट मांगी है।

विश्वविद्यालय का छात्र उमेश कुमार जोनवाल यहां के सामाजिक कार्य विभाग में अध्ययन कर रहा था। विश्वविद्यालय प्रषासन ने पिछले वर्ष मई में लगातार 15 दिन अनुपस्थित रहने पर उसे विश्वद्यालय से निष्कासित दिया था। जोनवाल ने इसे गलत बताते हुए विश्वविद्यालय में अपील की, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो उसने 18 नवंबर को निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका कोर्ट में दायर कर दी।

जोनवाल के समर्थन में कार्यरत सेंटर फॉर दलित राइट्स भी आ गया है। इसके पदाधिकारियों का कहना है कि मामला गंभीर है और केन्द्र सरकार को इस में हस्तक्षेप करना चाहिए। जोनवाल का कहना है कि वह अपने अधिकार के लिए हाईकोर्ट तक जाएगा, क्योंकि उसका निष्कासन पूरी तरह गलत है।

इधर इस मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा सरकार पर दलित अत्याचार का आरोप लगा चुके राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने इस मामले में बयान जारी कर कहा है कि हाल में हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र की आत्महत्या के बाद इस तरह का मामला सामने आना गंभीर बात है। इससे साफ जाहिर है कि भाजपा राज में अनुसूचित जाति व जनजाति के प्रति असहिष्णुता बरती जा रही है।

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