लखनऊ: पीलीभीत कांड में सोमवार को जज ने सभी आरोपियों को कस्टडी में लेने के लिए कहा है। फैसला लंच के बाद सुनाया जाएगा। सीबीआई के विशेष न्‍यायधीश लल्‍लू सिंह ने कहा कि यह सुनियोजित नरसंहार था। उन्‍होंने आरोपियों की रहम की मांग पर कहा कि यह सिस्टम का दुर्भाग्य है। जज ने कहा कि मैंने अपने फैसले में लिखा है कि जब तक एनकाउंटर के बदले पुलिस को प्रमोशन मिलता रहेगा तब तक यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं लेगा।

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25 साल पहले तीर्थयात्रा से वापस लौट रहे 11 सिखों को उग्रवादी बताकर फेक एनकाउंटर में मारने के मामले में स्थानीय सीबीआई कोर्ट 47 पुलिसकर्मियों की सजा के बिंदुओं पर आज लंच के बाद फैसला सुनाएगी।  सुबह से ही ज्‍यादातर मृतकों के परिजन कोर्ट पहुंच गए हैं। परिजनों में इस बात को लेकर खुशी है कि आज उनकी लड़ाई को मुकाम मिल गया।

शुक्रवार को 20 पुलिसकर्मियों को भेजा गया था जेल
-पिछले शुक्रवार को 20 पुलिसवालों को कोर्ट ने कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया था।
-कार्यवाही के दौरान गैरहाजिर 27 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी कर उनके जमानतदारों को दी गई थी।

जज ने क्‍या कहा
-जज ने कहा कि इससे बड़ा फर्जीफिकेशन और क्या हो सकता है
-कि जो एसओ जीडी में मुठभेड़ में लगा बताया जा रहा है वह उसी समय हॉस्पिटल में ड्रिप लगवा रहा होता है।
-इसकी तस्दीक खुद तात्कालिक डॉक्टर कोर्ट आकर करता है।

अभियोजन पक्ष ने क्‍या कहा
-अभियोजन पक्ष ने कहा कि जिनका काम रक्षा का होता है जब वहीं भक्षक बन जाएं तो उसके लिए सजाए मौत से कम कोई सजा नहीं हो सकती।
-इसलिए सभी आरोपियों को मौत की सजा दी जाए।
-वहीं बचाव पक्ष के वकील ने आरोपियों की उम्र को देखते हुए थोड़ी नरमी बरतने की मांग की है।

क्‍या था पूरा मामला
-सीबीआई के विशेष अभियोजक सतीश चंद्र जायसवाल के मुताबिक, घटना 12 जुलाई 1991 की है।
-नानकमथा पटना साहिब, हुजूर साहिब और अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हुए 25 सिखों का एक जत्था बस से वापस लौट रहा था।
-पीलीभीत जिले के कछालाघाट पुल के पास पुलिस ने सुबह करीब 11 बजे बस रोक ली।

लखनऊ: पीलीभीत कांड में सोमवार को जज ने सभी आरोपियों को कस्टडी में लेने के लिए कहा है। फैसला लंच के बाद सुनाया जाएगा। सीबीआई के विशेष न्‍यायधीश लल्‍लू सिंह ने कहा कि यह सुनियोजित नरसंहार था। उन्‍होंने आरोपियों की रहम की मांग पर कहा कि यह सिस्टम का दुर्भाग्य है। जज ने कहा कि मैंने अपने फैसले में लिखा है कि जब तक एनकाउंटर के बदले पुलिस को प्रमोशन मिलता रहेगा तब तक यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं लेगा।

25 साल पहले तीर्थयात्रा से वापस लौट रहे 11 सिखों को उग्रवादी बताकर फेक एनकाउंटर में मारने के मामले में स्थानीय सीबीआई कोर्ट 47 पुलिसकर्मियों की सजा के बिंदुओं पर आज लंच के बाद फैसला सुनाएगी।  सुबह से ही ज्‍यादातर मृतकों के परिजन कोर्ट पहुंच गए हैं। परिजनों में इस बात को लेकर खुशी है कि आज उनकी लड़ाई को मुकाम मिल गया।

शुक्रवार को 20 पुलिसकर्मियों को भेजा गया था जेल
-पिछले शुक्रवार को 20 पुलिसवालों को कोर्ट ने कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया था।
-कार्यवाही के दौरान गैरहाजिर 27 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी कर उनके जमानतदारों को दी गई थी।

जज ने क्‍या कहा
-जज ने कहा कि इससे बड़ा फर्जीफिकेशन और क्या हो सकता है
-कि जो एसओ जीडी में मुठभेड़ में लगा बताया जा रहा है वह उसी समय हॉस्पिटल में ड्रिप लगवा रहा होता है।
-इसकी तस्दीक खुद तात्कालिक डॉक्टर कोर्ट आकर करता है।

अभियोजन पक्ष ने क्‍या कहा
-अभियोजन पक्ष ने कहा कि जिनका काम रक्षा का होता है जब वहीं भक्षक बन जाएं तो उसके लिए सजाए मौत से कम कोई सजा नहीं हो सकती।
-इसलिए सभी आरोपियों को मौत की सजा दी जाए।
-वहीं बचाव पक्ष के वकील ने आरोपियों की उम्र को देखते हुए थोड़ी नरमी बरतने की मांग की है।

क्‍या था पूरा मामला
-सीबीआई के विशेष अभियोजक सतीश चंद्र जायसवाल के मुताबिक, घटना 12 जुलाई 1991 की है।
-नानकमथा पटना साहिब, हुजूर साहिब और अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हुए 25 सिखों का एक जत्था बस से वापस लौट रहा था।
-पीलीभीत जिले के कछालाघाट पुल के पास पुलिस ने सुबह करीब 11 बजे बस रोक ली। (newztrack.com)


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