2014 में महाराष्ट्र के पुणे में नमाज अदा कर लौट रहे युवक मोहसीन शेख की भगवा कार्यकर्ताओं द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर देने के मामलें में सरकारी वकील के रूप में अभियोजन पक्ष की और से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता उज्जवल निकम ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है.

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने निकम के अनुरोध पर अभियोजन पक्ष के वकील के तौर पर उनकी नियुक्ति पिछले महीने रद्द कर दी. महाराष्ट के विधि एवं न्याय विभाग की एक अधिसूचना में कहा गया कि निकम के अनुरोध पर विशेष सरकारी वकील के तौर पर उनकी नियुक्ति का फैसला वापस लिया जाता है.

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निकम के हटाने पर एआईएमआईएम के स्थानीय नेता अंजुम इनामदार ने हैरानी जताई है. इस बारें में उन्होंने कहा, अधिवक्ता निकम ने पहले किसी भी मामले में ऐसा नहीं किया, तो फिर इस मामले में ऐसा क्या हुआ जो उन्होंने अपनी नियुक्ति रद्द करने की मांग की? उन्होंने कहा कि निकम बताएं कि उनके इस मामले से अलग होने की क्या मजबूरी थी ?

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वहीँ मृतक के पिता सादिक शेख ने निकम से अपने फैसले पर पुन: विचार करने का अनुरोध करते हुए कहा, हमारे खयाल से निकम भारत के सबसे काबिल सरकारी वकील हैं. हमें पूरा भरोसा है कि वे हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे तो हमें न्याय मिलेगा. गौरतलब रहें कि इस मामलें में  हिंदू राष्ट सेना का सदस्य आरोपी हैं.


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