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जेएनयू की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) इकाई के उपाध्यक्ष जतिन गोराया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.  इस्तीफे देने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है कि वह दलितों के खिलाफ हमलों पर एबीवीपी के रुख़ से ‘उकता’ चुके हैं.

जतिन ने इस बारे में अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है कि ‘मैं एबीवीपी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं और खुद को एक जातिवाद, हास्यास्पद और पुरूष प्रधान संगठन से अलग करता हूं. एबीवीपी का आचरण उसके जोड़तोड़ वाले फासीवादी तथा रूढ़िवादी चेहरे को उजागर करता है.’

उन्होंने आगे लिखा कि ‘रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या और नौ फरवरी को हुई जेएनयू घटना से लेकर उना में दलितों की गरिमा और सामाजिक न्याय पर सवाल के संबंध में बढ़ती घटनाओं पर एबीवीपी ने विपरीत रूख लिया है. यह बिल्कुल भी चौंकाने वाली बात नहीं है कि एबीवीपी ने फर्जी राष्ट्रवाद, राष्ट्रवाद विरोधी बयानबाजी और अपनी फूट को उजागर कर और हम पर राष्ट्रवाद की अपनी घृणित विचारधारा थोपकर हमारी स्वयं की संस्था को कलंकित किया है.’

अपनी पोस्ट के आखिर में गोराया ने लिखा है कि ‘मेरा यह इस्तीफा रोहित वेमुला के सिद्धांतों को एक श्रद्धांजलि है. जिस ज़ज्बे के साथ रोहित ने भगवाधारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उसी भावना के साथ हम अपनी आखिरी सांस तक इन ताकतों से लड़ते रहेंगे और हर बार इनके मंसूबों पर पानी फेरते रहेंगे.’ बता दें कि इसी साल मार्च में ‘मनुस्मृति’ में ‘‘दलित एवं महिला विरोधी’’ सिद्धांतों के विरूद्ध जेएनयू परिसर में प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने इस प्राचीन ग्रंथ के पन्ने जलाए थे, जिसमें गोराया भी शामिल थे.


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