गौरक्षा के लिए किसनों के अलावा पशु बाजार से अन्य लोगों द्वारा पशुओं की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने वाले केंद्र के कानून को अब त्रिपुरा ने भी मानने से साफ़ इंकार कर दिया है.

त्रिपुरा के कृषि एवं पशु संसाधन विकास मंत्री अघोर देबबर्मा ने कहा कि केंद्र द्वारा जारी नया पशु व्यापार व पशु वध नियम लोगों के हितों के खिलाफ है. हम इन नियमों को लागू नहीं करेंगे.”

देबबर्मा ने कहा, “केंद्र सरकार ने हमें अभी तक पशु व्यापार व पशु वध नियम मुहैया नहीं कराए हैं. इस मुद्दे पर उन्होंने हमसे विचार-विमर्श नहीं किया.” देबबर्मा ने कहा कि किसानों के लिए जब मवेशी बेकार हो जाएंगे और वे उन्हें बेचने में सक्षम नहीं होंगे, तो फिर वे उनकी देखभाल कैसे करेंगे? यह कैसे तय होगा कि बाजार से जो पशु खरीदे जा रहे हैं, उनका वध नहीं किया जाएगा?

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वहीँ त्रिपुरा की माकपा इकाई के सचिव बिजन धर ने कहा, “भारी तादाद में लोग, खासकर दलित तबके के लोग मवेशियों की खाल का कारोबार करते हैं. मवेशी व्यापार से जुड़े किसान, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जो प्रोटीन के स्रोत के लिए सीधे मवेशियों पर निर्भर हैं, वे इस कानून से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे.”

उन्होंने कहा, “हमारे देश में संघीय व्यवस्था है. केंद्र सरकार कई चीजें राज्यों की सहमति के बिना नहीं कर सकती. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने एकपक्षीय तरीके से मवेशी व्यापार व पशु वध नियम बनाया है.”

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धर ने कहा, “नए नियमों के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में कोई पशु बाजार नहीं होगा. लेकिन त्रिपुरा में लगने वाले अधिकांश साप्ताहिक व सामान्य पशु हाट भारत-बांग्लादेश सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में आते हैं.”

उन्होंने कहा, “सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ऋण के बोझ तथा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण हर साल 12,000 से अधिक किसान खुदकुशी करते हैं. नया मवेशी व्यापार व पशु वध नियम किसानों और मवेशियों तथा उनके खाल के व्यापार में शामिल लोगों की चिंता को और बढ़ाएगा.”

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