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देश की राजधानी दिल्ली में रेनबसेरों को इस लिए बनाया जाता है ताकि इस में कोई भी इंसान अपना सर छुपा सके, ठण्ड से बचा सके,जिसके पास यहाँ अस्थाई रूप से अपना कोई माकन नहीं है या फिर वह यहाँ मुसाफिर है है या फिर रहने का कोई बंदोबस्त नहीं है , या फिर वह मज़दूर है ,य वह निहायत ही गरीब है। लेकिन यहाँ दिल्ली के रेनबसेरों का एक अलग ही मामलिा सामने आया है जो चौंका देने वाला है . खबरों के अनुसार यहाँ के रेनबसेरों में आज़मगढ़ और जम्मू कश्मीर के लोगों का प्रवेश वर्जित है।

इस बात को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका के दुवारा यह दावा किया गया है कि दिल्ली में गरीब मजदूरों को ठंड और बरसात में सिर छिपाने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए रैन बसेरों में आजमगढ़ और जम्मू कश्मीर के लोगों का प्रवेश वर्जित है।

इस पहलु पर दिल्ली पुलिस का कहना है की इस तरह का हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है और न ही कोई सुचना है। इस पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।

सूत्रों के अनुसार अनुसार विकी शर्मा नामक एक व्यक्ति कि जम्मू कश्मीर के डोडा का रहने वाला है और दिल्ली में मजदूरी करता है। पिछले एक दिसंबर को वह दिल्ली के अरुणा आसिफ अली रोड पर स्थित एक रैन बसेरे में रात भर रहने के इरादे से गया तो उसकी देखरेख करने वाले अधिकारी ने उसे रुकने की अनुमति नहीं दी। और कहा कि पुलिस द्वारा निर्देशित है कि आजमगढ़ और जम्मू-कश्मीर के लोग रैन बसेरे में नहीं रुक सकते।

इस के बाद विकी ने वकील कमलेश कुमार के दुवारा हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि चूंकि रैन बसेरे सभी के लिए हैं इसलिए किसी को इस में ठहरने से रोका न जाए।


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