मुंबई महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मजदूर और ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। सूखे की वजह से राज्य के लातूर, ओसमानाबाद और बीड में उद्योग-धंधों के बंद होने की वजह से लोग जीविका की तलाश में दूसरे जिलों का रुख कर रहे हैं।

एक सप्ताह के भीतर ही लातूर से लगभग 50,000 लोग औरंगाबाद और पुणे का रुख कर चुके हैं। लातूर के कलेक्टर पांडुरंग पॉल ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम 15 दिनों में एक बार पेयजल की आपूर्ति और अन्य कार्यों के लिए 10 दिन में एक बार जल-आपूर्ति करते हैं। मुझे इस तरह के पलायन की कोई जानकारी नहीं है।’

 लातूर: एक सप्ताह में 50,000 लोगों ने किया पलायन।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने हालांकि स्वीकार किया कि मराठवाड़ा से बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे शहर चले गए हैं। जानकारी के मुताबिक, लगभग 1.5 लाख लोग इन जिलों से पलायन कर चुके हैं।

अधिकारी ने बताया, ‘मार्च, अप्रैल और मई के महीने में स्थिति और अधिक भयंकर हो सकती है। जायकवाड़ी सिंचाई परियोजना 30 दिन से ज्यादा नहीं चल पाएगी। ऐसी स्थिति में रेलवे के द्वारा जल आपूर्ति करनी पड़ सकती है।’

उन्होंने बताया, कई गांवों को टैंकरों से जल-आपूर्ति की जा रही है। मराठवाड़ा के लिए 1640 टैंक, नंदेड़ में 243 टैंक, ओसमानाबाद में 241 टैंक और लातूर में 166 टैंकों से जल आपूर्ति की जा रही है।

जल संरक्षण सचिव प्रभाकर देशमुख ने बताया, ‘विदर्भ और मराठवाड़ा में राज्य सरकार स्थानीय लोगों को रोजगार गारंटी योजना के तहत रोजगार उपलब्ध करा रही है। इस योजना में नामांकन में तेजी से वृद्धि हुई है। इसी से सूखे से उत्पन्न गंभीर रोजगार संकट का अंदाजा लगाया जा सकता है।’

देशमुख ने बताया, इस सप्ताह लगभग 4.5 लाख लोगों को रोजगार दिया गया है और इससे पहले के सप्ताह में भी 4 लाख लोगों को काम दिया गया था। (नवभारत टाइम्स)


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