हैदराबाद से सटे सिकंदराबाद के अपोलो अस्पताल की दो महिला डॉक्टरों ने सड़क पर ‘मृत मान लिए गए’ एक घायल की जान बचाई है।

25 मिनट बाद वहां एंबुलेंस भी पहुंच गईडॉ फ़ायज़ा अंजुम और डॉक्टर सावित्री देवी क़रीब तीस डॉक्टरों के साथ रविवार शाम पिकनिक मनाने गईं थीं। उनकी बस के ड्राइवर ने बताया कि आगे हादसा हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है। इसलिए उसे बस मोड़नी पड़ेगी। दूसरे डाक्टर रेस्त्रां में चले गए, लेकिन फ़ायज़ा अंजुम और सावित्री देवी वहां गईं, हादसा जहां हुआ था।

वे भीड़ को हटाते हुए घायल के पास पहुंची लोगों ने घायल व्यक्ति को मृत मान लिया था। लेकिन डॉक्टर फायजा और सावित्री देवी ने उसकी आंखों की पुतलियां देखी तो उन्हें लगा कि वो व्यक्ति अभी ज‌िंदा है और उसे बचाया जा सकता है।

दोनों डॉक्टर उसे बचाने में जुट गईं। वे उन्हें क़रीब बीस मिनट तक कृत्रिम तरीक़े से सांस लेने में मदद करती रहीं। आख़िरकार उनकी सांसें लौट आईं। डॉक्टर फायजा ने बीबीसी को बताया, “हमारे पास कोई भी चिकित्सीय उपकरण नहीं था, सिवाए अपने अनुभव के। हमने लोगों से पेपर मांगा और उसका पाइप बनाकर मुंह से घायल को ऑक्सीजन देते रहे।”

फ़ायज़ा ने बताया, “डॉक्टर सावित्री उसे ऑक्सीजन दे रहीं थी और मैं सीने पर सीपीआर दे रही थी। बीस मिनट की कोशिशों के बाद उनकी सांस लौट आई।” उन्होंने बताया, “क़रीब 25 मिनट बाद वहां एंबुलेंस भी पहुँच गई। हमने घायल को एंबुलेंस में शिफ़्ट किया और सेलीन और ऑक्सीजन दी। हम दो किलोमीटर तक एंबुलेंस में उनके साथ रहे।”

स्थानीय नरसिंगी थाने के इंस्पेक्टर पी रामचंदर राव ने बीबीसी को बताया, “सड़क पर टहल रहे एक व्यक्ति को राज्य परिवहन निगम की बस ने टक्कर मार दी थी। घायल को उस्मानिया जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत ठीक है।” सड़क हादसे में मृत मान लिए गए शख़्स की जान बचाने के बारे में फ़ायज़ा कहती हैं, “कई बार हम अस्पताल में पूरी कोशिशों के बाद भी मरीज़ को नहीं बचा पाते हैं। लेकिन उस घायल की जान बचाकर मुझे लग रहा है कि एमबीबीएस की मेरी पढ़ाई सार्थक हो गई।” साभार: अमर उजाला

 


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