मद्रास हाई कोर्ट द्वारा राज्य के स्कूलों, दफ्तरों, कालेजों में वंदे मातरम को अनिवार्य किये जाने के फैसले के बाद महाराष्ट्र में भी इस फैसले को लागू करने की मांग उठने लगी है. बीजेपी विधायक राज पुरोहित ने राज्य के सभी स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों में ‘वंदे मातरम’ को कंपलसरी करने की मांग उठाई.

हालांकि इस फैसले का तीखा विरोध भी होना शुरू हो गया है. सबसे पहले इसका विरोध  महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अबू आज़मी  ने किया. उन्होंने कहा,” एक सच्चा मुसलमान वंदे मातरम नहीं गाएंगा. हालांकि, मैं वंदे मातरम का सम्मान करता हूं, लेकिन मेरा धर्म ये गवाही नहीं देता कि मैं वंदे मातरम गाऊं, इसके लिए भले ही सरकार मुझे जेल में क्यों न डाल दे या देश से बाहर निकल दे. लेकिन मेरा धर्म जिन बातों की इजाजत नहीं देता मैं वो नहीं करूंगा.

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इसी के साथ मुंबई से एआईएमआईएम(AIMIM) विधायक वारिस पठान ने भी अबू आजमी का साथ देते हुए कहा कि, “अगर मेरे गर्दन पर चाकू या कनपटी पर पिस्तौल भी रखे तो भी मैं वंदे मातरम नहीं बोलूंगा. ये किसी पर भी अपनी आइडियोलॉजी नहीं थोप सकते. मैं वंदे मातरम नहीं बोलूंगा, मेरा धर्म, कानून और संविधान इसकी मंजूरी नहीं देता. कोई विधानसभा में ये मामला उठाएगा तो भी मैं उसका विरोध करूंगा.

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गौरतलब रहें कि कुछ दिनों पहले असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, ‘भागवत साहब, आप मेरी गर्दन पर छुरी रख दें तो भी मैं भारत माता की जय नहीं कहूंगा.’ मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा, क्योंकि यह हमारे संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि भारत माता की जय बोलना जरूरी है.ओवैसी के इस बयान के बाद जमकर बवाल मचा था.

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