वाराणसी. दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्लय पर लगातार वामपंथी विचारधारा से प्रेरित होने का आरोप लग रहा है। देश भर में जेएनयू की आलोचना हो रही है। खास तौर पर वर्ग विशेष और संगठन विशेष से जुड़े लोग पानी पी पी कर जेएनयू को कोस रहे हैं। वहीं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भी जेएनयू से कहीं कमतर नहीं। आलम यह कि इस बीएचयू में जहां स्थापना दिवस पर आरएसएस पथसंचलन करता है तो उसके लिए विश्वविद्यालय स्तर से सारी सहूलियतें मुहैया कराई जाती हैं। इससे भी आगे जा कर विश्वविद्यालय अपने अधिकृत मेल से मीडिया को आरएसएस से जुड़ी खबरें मुहैया कराता है। शायद यह पहला और इकलौता विश्वविद्यालय है जहां से किसी संगठन की खबरें मीडियो को उपलब्ध कराई जा रही हैं। वह भी तब जबकि संबंधित संगठन का वह कार्यक्रम न विश्वविद्यालय परिसर में होता है न उससे खबर से विश्वविद्यालय का कोई सरोकार है।
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लगातार लगते रहे हैं बीएचयू पर आरोप
बीएचयू प्रशासन पर भगवाकरण को बढ़ावा देने के आरोप लगातार लग रहे हैं। गैर भाजपा दलों से जुड़े विद्यार्थी हों या आमजन अथवा विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्रनेता सभी की जुबान पर है कि पिछले दो साल में परिसर का भगवाकरण कर दिया गया है। इसी के तहत यहां संघ के स्वयंसेवक पथसंचलन करते हैं तो उसमें बीएचयू प्रशासन जहां सारी सुविधा मुहैया कराता है। बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंचल कहते हैं कि विश्वविद्यालय में संघ के स्वयंसेवक पथसंचलन करते हैं जिसमें कुछ विभागाध्यक्ष तक उसमें शरीक होते हैं। इससे बड़ी अराजकता और क्या हो सकती है। उसके बाद उस पूरे कार्यक्रम की कवरेज बीएचयू का मीडिया सेल करता है। लेकिन ये भगवा ब्रिगेड और उनसे जुड़े लोग जेएनयू पर आरोप लगाने से तनिक भी नहीं चूकते। गैर दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों का यहां तक आरोप है कि विश्वविद्यालय में इस वक्त दाखिले से लगायत शिक्षकों की नियुक्ति तक पर भगवा का सीधा-सीधा असर है। आईआईटी बीएचयू से निष्कासित गांधीवादी विचारधारा वाले डॉ. संदीप पांडेय ने तो बाकायदा विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया कि यहां नियमविरुद्ध तरीके से छात्रों का दाखिला हो रहा है। उनकी अर्हता केवल यह है कि वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य हैं। इस परिषद के एक सदस्य की शिकायत पर उन्हें विश्वविद्यालय से बाहर किया गया। डॉ. पांडेय शिक्षकों की नियुक्ति तक में संघ की दखलंदाजी का आरोप लगाते हैं।
जिस कार्यक्रम से विश्वविद्यालय का सरोकार नहीं उसकी विज्ञप्ति और फोटो अधिकृत मेल पर
रविवार को बीएचयू के सूचना विभाग ने तो अति ही कर दी। जिस कार्यक्रम से बीएचयू का कोई सरोकार नहीं। न वह कार्यक्रम परिसर में हो रहा है उसकी भी विज्ञप्ति और फोटो मेल कर दिया मीडिया को। यह कार्यक्रम पूरी तरह से आरएसएस का। आरएसएस के काशी प्रांत के कार्यवाह की पीसी जो विश्वसंवाद केंद्र में आयोजित थी उसे बीएचयू के अधिकृत मेल से भेजा जाना कहां तक उचित है यह मीडियाजनों की समझ से भी परे था। नाम न छापने की शर्त पर बीएचयू के कतिपय वरिष्ठ शिक्षकों ने भी इस पर कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि स्थापना दिवस पर आरएसएस का पथ संचलन समझ में आता है। हालांकि किसी शिक्षण संस्था में ऐसा कतई नहीं होने देना चाहिए। फिर भी वह एक कार्यक्रम जो विश्वविद्यालय से जड़ा था सो एक बारगी स्वीकार भी किया जा सकता है पर आरएसएस के किसी पदाधिकारी की प्रेसवार्ता की खबर विश्वविद्यालय कवर करे और उसे मीडिया को उपलब्ध कराए ऐसा तो देश क्या दुनिया के किसी विश्वविद्यालय में नहीं होता।
जेएनयू में ऐसा तो नहीं होता
शहर के बुद्धिजीवी हों या विश्वविद्यालय से जुड़े शिशक्षक अथवा छात्रनेता सभी विश्वविद्यालय की इस कार्रवाई को सिरे से नकारते हैं। कहते हैं कि ऐसी कोई कार्रवाई तो जेएनयू में नहीं होती। जेएनयू वामपंथ, कांग्रेस या समाजवादी विचारधारा के कार्यक्रमों को न तो संचालित करती है न उनके किसी कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के मीडिया सेल कवर करता है। यह महामना की विचारधारा से कतई मेल नहीं खाता। महामना ने विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया था। सनातनी हिंदू सोच का मतलब कतई किसी संगठन से जुड़ाव या उसकी विचारधारा को प्रसारित करना कतई नहीं। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। (Patrika)

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