नई दिल्ली : दिल्ली के ज्यादातर लोग गाड़ियों के लिए ऑड-ईवन स्कीम को फिर से लागू करना चाहते हैं। आम पब्लिक की तरफ से मिल रही प्रतिक्रिया से कुछ ऐसे ही संकेत दिल्ली सरकार को मिले हैं। राजधानी में बढ़ते पल्यूशन की प्रॉब्लम को कंट्रोल करने के लिए 1 से 15 जनवरी के बीच लागू की गई इस स्कीम की कामयाबी के बाद राजधानी में इसे दोबारा लागू करने के बारे में सरकार आम लोगों से राय ले रही है।

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खास बात यह है कि सरकार को 12 लाख से भी ज्यादा लोगों की राय मिल चुकी है, जिनमें से ज्यादातर लोगों का कहना है कि इस फॉर्म्युले को फिर से लागू किया जाए। सोमवार को दिन में 2 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 दिनों में लगभग 10 लाख लोगों ने फोन के जरिए ऑड-ईवन स्कीम पर अपना फीडबैक दिया है। इसमें 1,82,808 लोगों ने सरकार की ओर से जारी एक स्पेशल फोन नंबर पर मिस्ड कॉल करके अपनी राय दी है। वहीं 28,304 लोगों ने ऑनलाइन फॉर्म भरकर बताया है कि वे क्या चाहते हैं, जबकि 9000 लोगों ने ईमेल के जरिए ऑड-ईवन पर अपनी राय दी है। उम्मीद की जा रही है कि यह आंकड़ा 15 लाख से ज्यादा भी हो सकता है।

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दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठi अधिकारी का कहना है कि मंगलवार को सरकार दिल्लीवासियों से की गई रायशुमारी से जुड़े डेटा सामने लाएगी और यह बताया जाएगा कि कितने लोगों ने क्या-क्या अपनी राय दी है। दूसरी ओर स्कीम को दोबारा लाने को लेकर दिल्ली के सभी वॉर्डों में विधायकों ने भी मोहल्ला सभाओं का आयोजन किया और इनके जरिए स्थानीय लोगों से स्कीम के बारे में सुझाव लिए गए हैं। ये सभाएं 6 और 7 फरवरी को की गई थीं। इन सभाओं में आम लोगों से ली गई प्रतिक्रियाओं पर अभी विश्लेषण होना बाकी है। इसके बाद ही सरकार तय करेगी कि दिल्ली में एक बार फिर से ऑड-ईवन कबसे शुरू करना है।

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ऑड-ईवन दोबारा लागू करने जा रही सरकार इस बार पहले की तुलना में सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रही है। इसमें लोगों को दी गई छूट में कटौती किए जाने की संभावना है, लेकिन अंतिम फैसला ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर करने पर होगा। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अनुसार दिल्ली में करीब 35-38 लाख बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं, इनमें से 5-7 लाख बच्चे प्राइवेट गाड़ियों का यूज करते हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें लाने-ले जाने के लिए प्राइवेट कारों का यूज किया जाता है। सरकार ऐसे बच्चों को भी कार पूलिंग के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। इसके अलावा स्कूलों में लगी डीटीसी बसों को व्यवस्थित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

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