कर्नाटक सरकार ने राज्य के लिए एक अलग झंडे और सिंबल के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है. फिलहाल जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी और राज्य का अपना अलग झंडा नहीं है.

कर्नाटक में अलग झंडे के लिए 2012 में मांग उठी थी. हालांकि उस वक्त भाजपा सरकार थी, बीजेपी ने इस कदम को देश की एकता और अखंडता के खिलाफ बताया था. इस बारें में केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा, बीजेपी का मत इस बात को लेकर एकदम साफ है कि राष्ट्रीय भावनाओं को राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से हमेशा ऊपर रखा जाएगा.

और पढ़े -   गुजरात में स्वाइन फ्लू का कहर, मरने वालों की संख्या पहुंची 242 तक

इस फैसले को आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. कुछ ही महीने में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस बारें में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि इस मसले का चुनाव से कुछ लेना-देना नहीं है. अगर बीजेपी इसका विरोध कर रही है तो यह बात सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं कहती कि वह राज्य के झंडे के खिलाफ है.

और पढ़े -   गौशाला में गौ-माताओं को मार कर खालों की तस्करी करता था बीजेपी का गौभक्त नेता

 केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि एक राज्य का अपना अलग झंडा हो सकता है बशर्ते राष्ट्र ध्वज की सर्वोच्चता का उल्लंघन न हो. कर्नाटक के आईटी मिनिस्टर प्रियांक खड़गे ने भी ट्वीट किया कि संवैधानिक दायरे के अंदर अपनी अलग पहचान बनाने में कुछ भी गलत नहीं है.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE