docकेंद्र सरकार द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद से ही देश भर में अफरा-तफरी का माहोल बना हुआ हैं. इसका सीधा प्रभाव लोगों के रोजगार पर पड़ रहा हैं. रोजगार के अभाव में यूपी के लोग नसबंदी कराकर पैसों की जरूरत पूरी कर  रहे हैं. याद रहें कि उत्तरप्रदेश में नसबंदी कराने पर पुरुष को सरकार की तरफ से 2000 रुपए और महिला को 1400 रुपए मिलते हैं.

नोटबंदी के बाद से ही यूपी में नसबंदी के मामलों में में अनअपेक्षित बढ़ोतरी देखी गई. अलीगढ़ में नवंबर महीने में ही दोगुना नसबंदी के मामले सामने आए हैं. छले साल इस महीने जहां नसबंदी के 92 मामले सामने आए थे वहीं इस साल यह दोगुना होकर 176 हो गए.

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वहीँ आगरा में  पिछले साल 450 नसबंदी हुई थीं वहीं इस साल नवंबर माह में अब तक 908 मामले सामने आए हैं जिनमें से 904 तो महिलाएं हैं और 4 पुरुष हैं. इसी तरह गोरखपुर में अब तक 38 मजदूर नसबंदी करा चुके हैं. पीएसआई के टीम लीडर संदीप पांडेट ने बताया कि 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद से नसबंदी कराने के लिए आने वाले मजदूरों की संख्‍या में इजाफा हुआ है.

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नसबंदी करवाने वालों में एक पुरण शर्मा भी हैं जो अलीगढ़ में रहते हैं. उनकी पत्‍नी दिव्‍यांग हैं और वो नसबंदी के लिए नहीं जा पाई. शर्मा को इसके बाद 2 हजार रुपए मिले हैं जो उन्‍हें तंगी के दिनों में राहत दे सकेंगे. शर्मा के अनुसार उन्‍हें एक स्‍थानीय आशा कार्यकर्ता ने बताया था कि अगर वो नसबंदी करवा लेते हैं तो उन्‍हें पैसा‍ मिलेगा. मुझे पैसे की बेहद जरूरत थी ताकि घर चला सकूं.

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शर्मा के अनुसार आशा दीदी ने बताया कि नसंबदी से पैसे मिलेंगे जिसके बाद मैंने नसबंदी करवाने का निर्णय लिया. अब जो पैसा मिला है उससे घर में कुछ खाने का सामान ला पऊंगा. हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों का मानना है कि नसबंदी के मामलों में इतनी बढ़ोतरी बढ़ती जागरूकता का नतीजा है.


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