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अखिल भारतीय श्री धर्म रक्षा सेना के राष्ट्रीय संयोजक जानकी शरण अग्रवाल ने हरिद्वार प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में स्वामी स्वरूपानन्द पर आरोप लगाया कि वह ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य नहीं हैं.

उन्होंने आगे कहा कि स्वामी स्वरूपानन्द एवं उनके तथाकथित चेला प्रोपर्टी डीलर एवं बिल्डर हैं और ज्योतिश्पीठ हथियाने के लिए साधु सन्तों, नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की प्रयास करते हैं. स्वरूपानन्द जी सत्य सांई बाबा पर लगातार हमले कर रहे हैं उनको चांद मियां बता कर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं जबकि सांई बाबा राजस्थान में जोधपुर जिले के फलौदी निवासी हैं. उनका नाम श्री वाधमल थानवी एवं सन्यास का नाम संत श्याम गिरि था सांई बाबा ने नेपाली बाबा के दादा गुरू जूना अखाड़े के केशवानन्द से उज्जैन कुम्भ मेले में गुरू दीक्षा ली थी. इनका हिन्दु पुष्करणा ब्राम्हण परिवार में जन्म हुआ था.

उन्होंने आगे कहा कि शंकराचार्य परम्परा से बनते हैं मीडिया में विज्ञापन देने से नहीं. इलाहाबाद हाईकोर्ट में इन्होंने जो पेपर बुक दाखिल किये हैं 10 हजार पेज में लगभग 5 हजार पेज अखबारों छपे विज्ञापनों के हैं. श्री आदि शंकराचार्य जी द्वारा निर्धारित परम्परा के अनुसार श्री गोवर्धन पीठ, श्री श्रृंगेरी पीठ, श्री द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वयं अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करते हैं तो ज्योतिष्पीठ का उत्तराधिकारी शंकराचार्य अदालत निर्धारित क्यों करे ? शंकराचार्य परम्परा को स्वामी स्वरूपानन्द जी द्वारा तोड़ा जाना क्या उचित है ?

उन्होंने कहा स्वामी स्वरूपानन्द जी से मेरे सवाल हैं कि आप किस सन्त परम्परा से हैं? आप कौन सी परम्परा से शंकराचार्य हैं? ज्योतिष पीठ के कौन से शंकराचार्य ने आपको अपना अपना उत्तराधिकारी बनाया? जब वसीयत इलाहाबाद पंजीकृत कार्यालय से स्वयं मंगाई गई हो तो वह फर्जी कैसे हो गई? स्वामी स्वरुपानन्द जी के द्वारा 12 जून 1953 को स्वयं अपने हाथों से काशी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के पद पर स्वामी शांतानंद जी का अभिषेक किया गया था तब वह आपको अयोग्य नजर क्यों नहीं आये? आपने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य बनने के लिए स्वामी कृष्णबोधाश्रम जी को माध्यम क्यों बनाया? स्वामी कृष्णबोधाश्रम जी जो कि स्वयं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य नहीं थे उनकी वसीयत के दोनें गवाह राजेन्द्र शर्मा, शंभूदयाल गौंड ने अदालत में बयान दिया है कि वह फर्जी है तब स्वामी स्वरूपानंद उनके उत्तराधिकारी कैसे हुए? क्या आप दिनांक 05 अगस्त 1953 से लगातार ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य बनने का प्रयास नहीं कर रहे हैं? आपको अदालत ने किस आधार पर ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित किया है? नेताओं और अभिनेताओं के साथ फोटो खिंचा लेने से क्या कोई शंकराचार्य बन सकता है? स्वामी स्वरूपानंद जी इन सभी सवालों के उत्तर दें.

देवभूमि मीडिया इनपुट के साथ


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