हैदराबाद विश्वविद्यालय में रोहित विमुला की खुदकुशी यहां का अकेली घटना नहीं है. सच्चाई ये है कि पिछले 10 सालों में 8 दलित छात्र आत्महत्या कर चुके हैं.

हैदराबाद विश्वविद्यालय : 10 सालों में 9 दलित छात्र कर चुके हैं आत्महत्या

इन घटनाओं के पीछे जाति के आधार पर भेदभाव बताया जा रहा है.

अंग्रेजी अखबार टाईम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक छात्र नेता जुहैल केपी ने बताया है कि पिछले 10 सालों में 9 दलित छात्र की मौत के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं जागा है. रोहित की मौत ने विश्वविद्यालय में दलित छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव को उजागर कर दिया है.

जुहैल ने बताया कि रोहित के आत्हत्या करने के बाद से वो मुद्दे सामने आए हैं जिन पर काफी दिनों से पर्दा डाला जा रहा है. वहीं कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि दलितों के छात्रों को अक्सर कैंपस के अंदर नीचा दिखाया जाता है.

उनका कहना था कि गैर दलित बिरादरी के छात्र अक्सर उन पर छींटाकसी, प्रताड़ित करते हैं. वहीं सुप्रीमकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्केडेय काटजू ने सोशल साइट पर लिखा है कि ‘ये राष्ट्रीय शर्म की बात है. जब तक हम सामंती मानसिकता से बाहर नहीं आएंगे तब तक देश विकास नहीं कर सकता है.’

इससे पहले कब हुईं ऐसी घटनाएं? 2013 में ही पीएचडी छात्र एम वेंकटेश ने आत्महत्या की थी. उन्होंने भी दलित छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव से परेशान होकर ये कदम उठाया था. 2008 में पीएचडी के छात्र सेंथिल कुमार ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी. इस केस में पाया गया कि उनके बैकलॉग्स की वजह से उनकी छात्रवृत्ति रोक दी गई थी. जिससे परेशान होकर उन्होंने ये कदम उठा लिया था. इसके अलावा पिछले 10 सालों में कई दलित छात्रों ने अलग-अलग कारणों से खुदकुशी है?


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