जयपुर: धर्म परिवर्तन के कानून को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने वसुंधरा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

प्रतापनगर की पायल उर्फ आरिफा के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को धर्म परिवर्तन से संबंधित नियम और कानून की जानकारी पेश करने को कहा है. कोर्ट ने सवाल करते हुए कहा कि निकाह के आधार पर क्या धर्म परिवर्तन हो सकता है?

जस्टिस जी के व्यास और जस्टिस एम के गर्ग की पीठ ने कहा कि ‘सिर्फ दस रुपये के स्टांप पेपर पर हलफनामा देने से’ लड़की का धर्म परिवर्तन कानूनी तौर पर जायज है, जबकि कानून में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है. इस मामले में अगली सुनवाई सात नवम्बर को होगी. युवती को अब नारी निकेतन भेजने के आदेश दिए गए हैं.

हालांकि इस दौरान एसएचओ अचलसिंह ने अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास के जरिये कोर्ट को बताया कि निकाहनामा की जांच करवाई गई है, वो सही है. लेकिन कोर्ट ने कहा कि कैसे सही है यह तो प्रथम दृष्टया फर्जी लग रहा है क्योंकि निकाहनामा में जो गवाह है और कोर्ट में जो शपथ पत्र दिया है, वो अलग-अलग हैं ऐसे में यह तो फर्जी लग रहा है.

ध्यान रहे 14 अप्रैल 2017 को लड़की ने धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम लड़के से निकाह किया था. हालांकि छह माह बाद तक भी अपने पिता के घर में रह रही थी. 25 अक्टूबर 2017 को लड़की घर से भाग कर अपने पति के पास चली गई.


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