burqa_1

मुजफ्फरनगर: तीन तलाक को लेकर चल रही बहस के बीच अब तीन तलाक पर प्रतिबंध की मांग करने वाली मुस्लिम महिलाओं और तीन तलक पर ऐतराज जताने वाले मुस्लिम बुद्धिजीवियों को निशाना बनाते हुए शरई अदालत के सदर मौलाना इरफान ने कहा कि शरीयत का कानून अल्लाह का कानून है, इसमें बदलाव का हक सिर्फ अल्लाह को ही है.

उन्होंने कहा, देश की संसद सिर्फ उस कानून को बदल सकती है, जिसे उसने बनाया हो लेकिन शरीयत का कानून अल्लाह का कानून है, इसमें बदलाव का हक सिर्फ अल्लाह को ही है. और जिन्हें तीन तलाक पर ऐतराज हैं वह अपना मसलक या धर्म बदल सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम शिया फिर्के में भी तलाक के अलग नियम हैं, लेकिन हमें उस पर हमें कोई ऐतराज नहीं.

और पढ़े -   बलात्कार के मामले में पीड़िता ने नहीं किया समझौता तो बीजेपी नेता ने पति को लाठी-डंडों से पीटा

दूसरे फिर्कों में तलाक किस तरह दिया जाता है, यह उनका विषय है. मुस्लिम सुन्नी फिर्के के लोग उस पर ऐतराज जताते हैं तो ये उनकी परेशानी है, शरीयत की नहीं. इसलिए वह अपनी परेशानी को दूर कर सकते हैं. जिसे जिस मसलक में जो तरीका पसंद आता है वह उस मसलक या धर्म का अख्तियार कर सकता है.

तलाक को लेकर उन्होंने कहा कि तीनों तलाक की एक बार में इजाजत नहीं है, लेकिन यदि एक बार में दे दिया जाता है तो मान्य है.

और पढ़े -   आपसी भाईचारे की मिसाल बनता रेलवे स्टेशन फैजाबाद मस्जिद का रोज़ा अफ्तार

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE