नई दिल्ली 8 अप्रैल 2016 (प्रेस विज्ञप्ति) देश के पांच राज्यों खास तौर से पश्चिम बंगाल के हाल के विधानसभा चुनाव को सांप्रदायिक दलों और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के बीच आरपार की लड़ाई बताते हुए आल इंडिया मुत्तहिदा मिल्ली महाज़ के राष्ट्रीय महासचिव अहसन महताब खान ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं का राज्य में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा निर्णायक स्थान है और उनका वोट राष्ट्रीय राजनीति का रुख तय करता है।

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इस लिए हमें हाल के विधानसभा चुनाव में सांप्रदायिक ताकतों की साज़िशों से चौकन्ना रहते हुए साम्प्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष पार्टी के उम्मीदवारों के बीच भेद करना और अच्छे उम्मीदवारों को भारी बहुमत से जिताना चाहिए। उन्होंने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में बंगाल को मंगल पांडे जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का केंद्र और क्रांति और आंदोलन की भूमि बताते हुए कहा कि हर ज़माने में यहां से उठने वाली आवाज ने क़ौम व देश की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है। यह चुनाव भी राष्ट्रीय राजनीति का नक्शा बदलने और उसे सही दिशा में डालने में अहम रोल अदा करेगा। उन्होंने सांप्रदायिक ताक़तों द्वारा देश को धर्म, संस्कृति और भाषा के नाम पर बांटने और यहाँ मिले जुले सांस्कृतिक मूल्यों का हनन करने की साजिश से राज्य की जनता को अवगत करते हुए कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ आरएसएस समर्थित भाजपा सरकार ने 2014 में सत्ता की कुर्सी संभालने के बाद इस देश के सेक्युलर ताने बाने और सांप्रदायिक सौहार्द व सद्भाव को जितना बुरी तरह नुकसान पहुँचाया है, इस की रौशनी में राज्य की जनता को यह फैसला करने में देर नहीं लगेगी कि हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित कांग्रेस ही वह एकमात्र पार्टी है जो निराशा के अंधेरे को दूर कर सकती है और देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को मजबूत करते हुए उसे धर्म और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर विकास की ऊंचाई पर ला सकती है।

उन्होंने बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार को सरमाया तथा कुछ विशिष्ट हितों का गुलाम करार दिया और कहा कि वह भारी बहुमत से सफ़ल होने के बाद पिछले पांच साल में यहां की जनता को सब्ज बाग दिखाने और धार्मिक भावनाओं के नाम पर उनका राजनीतिक शोषण करने के सिवा कुछ नहीं किया है। उन्होंने आंकड़ों के आधार पर कहा कि बंगाल में गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी आम है, व्यापारियों, मजदूरों और पेशेवरों की हत्या और पूंजीपतियों की दादागिरी अपने चरम पर है, हर क्षेत्र में राज्य के अल्पसंख्यकों की उपेक्षा की गई है, ऐसे में अगर यहां के मतदाता केवल अल्पसंख्यक राजनीतिक चेतना से काम लेते हुए एक बार राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को सत्ता संभालने का मौका दें तो इससे पश्चिम बंगाल की तस्वीर राजनीतिक स्तर पर बदल सकती है और यह भी विकास के नक़्शे में अपना नाम दर्ज करा सकती है। मेहताब खान ने कहा कि यहां की जनता ने वामपंथियों की 35 /साल की पुरानी और स्थिर सरकार को राजनीति के महल से बेदखल करके ममता बनर्जी को बड़ी उम्मीदों के साथ सत्ता की कुर्सी सौंपी थी, मगर वह भी राजनीतिक मंच से बयानबाजी और विरोधियों के साथ संघर्ष में व्यस्त रहकर राजनीति की रोटी सेंक रही हैं और यहां के गरीब जनता, मजदूर और अल्पसंख्यकों के लिए कोई मुस्तक़िल और दूरगामी काम नहीं किया। उन्हों ने कोलकाता में पुल के विध्वंस की दुखद घटना पर मरने वालों के परिजनों के साथ हमदर्दी व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार को अपनी विफलता का ठीकरा दूसरों के सिर न फोड़कर इस पुल के विध्वंस की राजनीतिक व नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने का हौसिला दिखाना चाहपए।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी का अनुपात 27 / प्रतिशत के करीब है, यह जिस पार्टी के साथ जाएंगे, जीत उसके कदमों में होगी। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से लेकर अब तक जितने संसदीय और विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें जीत और हार को तय करने में यहां के अल्पसंख्यकों खास कर मुसलमानों की ही प्रमुख भूमिका रही है, इसलिए इस बार भी अल्पसंख्यकों और मुस्लिम वोटों का पलड़ा जिधर झुकेगा, इस पार्टी की किस्मत का सितारा चमक जाएगा।

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