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2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद अपना सब कुछ खो बेठे दंगा पीड़ितों को कई मजबूरियों का सामना करना पड़ रहा हैं. इन पीड़ितों को सरकार की किसी योजना का भी लाभ नहीं मिल पा रहा हैं. तकिरबन 1000 से अधिक लोगों को मजदूरी करने के लिए दुसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा हैं.

दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम कर रहे अफकार इंडिया फाउंडेशन’ के अनुसार ज्यादातर बेघर हुए परिवारों के कागजात और दस्तावेज दंगे के समय खो जाने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिल रहा हैं उन्हें मनरेगा जैसी योजनाओं में भी काम नहीं मिला जिसके कारण इन परिवारों को दुसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ रही है.

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अफकार इंडिया फाउंडेशन के अकरम अख्तर के अनुसार, दंगे के बाद 50,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे. करीब 6,000 परिवारों को उनके घरों से भगा दिया गया था और उन्हें कहीं और ठिकाना खोजने को मजबूर होना पड़ा. इनमें से करीब 2,800 परिवार शामली जिले में रहने लगे. दंगे को 3 साल हो गए हैं और इन परिवारों में से ज्यादातर को अब तक राशन कार्ड तक नहीं मिल सका है. कई परिवारों के पास पानी का और बिजली का कनेक्शन भी नहीं है। ये परिवार बेहद दयनीय हालत में रह रहे हैं. ऐसे में अपना गुजारा चलाने के लिए उन्हें मजदूरी करनी पड़ रही है.’

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हमारे विभाग ने बेघर हुए लोगों को ऑनलाइन अपने कागजातों के लिए आवेदन करने को कहा है – मनोज कुमार (ADO)

दंगे के बाद 9 गांवों को वरीयता दी गई थी. इन जगहों में बेघर हुए लोगों को राशन कार्ड दिया गया. बाकी गांव काफी फैले हुए हैं. वे सामान्य प्रक्रिया के तहत कागजातों के लिए आवेदन कर सकते हैं. अगर कोई दिक्कत हो, तो वे जिला प्रशासन या आपूर्ति प्रभारी से संपर्क कर सकते हैं’ – मदन यादव (DSO)

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