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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में तीन साल पहले हुए दंगों के बाद शरणार्थी बने सैकडों लोगों को अखिलेश सरकार बुनियादी सेवाएँ भी नहीं दे रही हैं.

खराब सेहत और साफ-सफाई के बुरे हालात से संघर्ष करने के साथ उन्हें बेईमान रीयल इस्टेट डेवलपर भी लुट रहे हैं. लिविंग अपार्ट : कम्युनल वॉयलेंस एंड फोस्र्ड डिस्प्लेसमेंट इन मुजफ्फरनगर एंड शामली शीर्षक वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नीय बड़े किसानों और रीयल इस्टेट डेवलपरों ने मुस्लिम बहुल गांवों में जल्दीबाजी में बसाई गयी कॉलोनियों में विस्थापित लोगों को अत्यधिक दरों पर भूखंड बेचे.

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अमन बिरादरी के हर्ष मंदर के अनुसार , ज्यादातर खुद बसाई इन कॉलोनियों में बहुत बुरे हाल हैं और बुनियादी सरकारी सेवाएं भी नहीं हैं और अंातरिक रूप से विस्थापित लोगों के सामने पेयजल और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है.

गौरतलब रहें कि मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में तीन साल पहले हुए दंगों में 60 से अधिक लोग मारे गये थे और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे. जिनमे से 29,329 65 शरणार्थी मुजफ्फरनगर की 28 और शामली की 37 कॉलोनियां में रहते हैं.

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