मेरठ – यूपी के मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए दंगों को लेकर चल रहे केस में शुक्रवार को मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आगजनी और 10 वर्षीय बच्चे तथा 30 वर्षीय महिला की हत्या के दस आरोपियों को बरी कर दिया।

Muzaffarnagar Riots Court Lets Off 10 In Murder Of Boy Woman

 अपर जिला जज अरविंद कुमार उपाध्याय द्वारा सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिए जाने के बाद बीजेपी ने जश्न मनाया। गौरतलब है कि बीजेपी के कुछ सदस्य इस मामले में आरोपी थे।

बीजेपी विधायक और दंगे के आरोपी सुरेश राणा ने कहा, ‘इस फैसले से सच सामने आ गया है। हजारों मासूम हिंदुओं को स्थानीय प्रशासन के द्वारा सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के इशारे पर परेशान किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘एसपी को सबक सिखाने के लिए हम इस फैसले को आगे तक ले जाएंगे, खासकर 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में हम एसपी को जवाब देंगे।’

गौरतलब है कि घटना के बाद एसआईटी ने 10 लोगों को इसमें शामिल पाया था, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम करने वाले एनजीओ, अस्तित्व की डायरेक्टर रिहाना अदीब ने कहा, ‘एक महिला और एक बच्चे की हत्या हुई थी, यह एक फैक्ट है और इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। अगर बरी किए गए लोगों ने वह किया था तो किसी ने तो किया था। हम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दे सकते लेकिन न्याय व्यवस्था में हमारा पूरा विश्वास है।’


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