सरकारी वकील ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में 21 जनवरी को एक फास्ट ट्रैक अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था जबकि एक सत्र अदालत ने इस माह दोहरे हत्याकांड में दस आरोपियों को बरी कर दिया था।

वर्ष 2013 के दंगों के दौरान सामूहिक दुष्कर्म और दोहरे हत्याकांड के 14 आरोपियों को बरी किये जाने के निचली अदालत के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार उच्च न्यायालय में चुनौती देगी। जिले के सरकारी वकील दुष्यंत त्यागी ने बताया, ‘‘हम लोगों ने दंगा से जुड़े दो मामलों के 14 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिये जाने के खिलाफ याचिका दायर करने की अनुशंसा की है। सबूतों के अभाव में यहां निचली अदालतों ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चार और दोहरे हत्याकांड में दस लोगों को बरी कर दिया था।’’

उन्होंने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में 21 जनवरी को एक फास्ट ट्रैक अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था जबकि एक सत्र अदालत ने इस माह दोहरे हत्याकांड में दस आरोपियों को बरी कर दिया था। आरोपियों को दोषमुक्त किये जाने के फैसले के खिलाफ जिला के अधिकारियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है और इस आशय का ‘‘मसौदा’’ राज्य सरकार को भेजा गया है। उच्च न्यायालय में जल्द ही याचिका दायर की जायेगी। मुजफ्फरनगर और पड़ोसी जिलों में वर्ष 2013 के सांप्रदायिक दंगों में 60 से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। (Jansatta)


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