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इमाम वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में मौलाना जव्वाद ने  वक्फ के बिगड़े हुए निजाम के लिए मुतवल्लियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 80 प्रतिशत मुतवल्ली शराबी व हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनकी वजह से वक्फ का संचालन बिगड़ा हुआ है.

उन्होंने आगे कहा कि उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकतों की वजह से वक्फ संपत्तियों पर कब्जे हो रहे हैं और उन्हें बेचा जा रहा है. इसमें मंत्रियों की भी मिलीभगत है. इसलिए जरूरी है कि सीबीआई जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

 कल्बे जव्वाद के अनुसार इलाहाबाद में शिया वक्फ  बोर्ड की संपत्ति को बर्बाद करने की कवायद चल रही है. जिन बेईमान लोगों के खिलाफ मुकदमें कायम हुए थे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने सब वापस ले लिये हैं. शिया-सुन्नी अवकाफ में लूट लगातार जारी है. इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए हम बहुत दिनों से मांग कर रहे हैं लेकिन इस सरकार ने रोजेदारों पर लाठियां बरसाईं और एक रोजेदार को शहीद भी कर दिया.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इलाहाबाद में वक्फ की एक जमीन को बेच दिया गया था. जब वहां की अवाम ने एफआईआर दर्ज कराने का फैसला लिया तो वक्फ मंत्री बराबर फोन कर रहे थे किसी भी कीमत पर रिपोर्ट दर्ज नहीं होनी चाहिये. उन्होंने कहा कि मस्जिदों के इमामों व मोअज्जिनों को वक्फ बोर्ड के जरिये मासिक वेतन दिये जाना चाहिये. सरकार 1993 का सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यूपी में भी लागू करे. साथ ही हमारे वक्फ के निजाम को उलेमाओं के सुपुर्द करे.


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