मेरठ: जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने उत्तर प्रदेश सरकार और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से मांग की है कि वह चुनावी घोषणा पत्र में मुसलमानों से किए गए वादे को पूरा करें और अविल्म्ब आबादी के अनुपात से उन्हें आरक्षण देने की घोषणा करें.

maulana madani adressing photo

मौलाना मदनी ने ऐतिहासिक शहर मेरठ के फैज़.ए. आम इंटर कॉलेज में जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश पश्चिमी ज़ोन के तत्वाधान में आयोजित हुसूल.ए. इंसाफ सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने घोषणा पत्र में अठारह प्रतिशत आरक्षण  का वादा किया था तो वह बताएं कि इन चार सालों में इस दिशा में क्या प्रयास हुए और अगर नहीं तो क्यों?

मौलाना महमूद मदनी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर वादे केवल किसी को खुश करने के लिये थे तो 18 प्रतिशत क्यों 100 प्रतिशत का कर लिया जाता, तो ज्यादा अच्छा होता। उन्होंने इस सच को माना कि समाजवादी पार्टी ने यह वादा करते समय कानूनी और सैद्धांतिक पहलुओं को नजरअंदाज किया था।

उन्होंने कहा कि हम तो केवल इतनी मांग करते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार भी आंध्र प्रदेश कर्नाटक तमिलनाडु और केरल की तर्ज पर आर्थिक सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए कानून बनाए। मौलाना मदनी ने यूपी सरकार को उल्लेख किया कि अगर वह हमारी मांगों पर अभी भी गम्भीरता नहीं दिखाई तो हम राज्य के विभिन्न शहरों में आंदोलन चलाएंगे। जिसकी शुरुआत मेरठ से हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि हमें सबसे ज्यादा उम्मीद अखिलेश यादव की युवा अगुवाई से थी। केवल हम नहीं बल्कि पूरा देश उनसे उम्मीद कर रहा था कि वह पिछड़े और वर्गों विशेष तौर पर  मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए काम करेंगे। उन्होंने कई वादे भी किए जिससे एक उम्मीद पैदा हुई थी लेकिन चार साल के इंतजार के बाद यह कहने पर मजबूर हूँ कि वह लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे।

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मुजफ्फरनगर दंगों के दोषियों को मिले सजा

हाल में मुजफ्फरनगर दंगों के सिलसिले में आए फैसले के संदर्भ में मौलाना मदनी ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के दोषियों को सजा दिलाए बिना न्याय का कोई निहित पूरा नहीं हो सकता। लेकिन अफसोस की बात है सरकार की सुस्ती के कारण आज तक अपराधी आज़ाद घूम रहे हैं। नतीजा हमारे सामने है कि दंगों में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होने से सांप्रदायिक ताकतों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे सशस्त्र ट्रेनिंग शिविर स्थापित करके चला रहे हैं और यहां की न्याय व्यवस्था का यह हाल है कि मेरठ पुलिस मुख्यालय को ये पता नहीं है कि उसकी नाक के नीचे कैसा खेल खेला जा रहा है। जबकि धर्म सेना की ट्रेनिंग देने वाले टीवी चैंनलों पर अपने इरादों से लोगों को अवगत करा रहें हैं।

सरकार को खबर नहीं लाखों का यह मजमा जानना चाहता है कि इस खतरनाक खुलासे के बावजूद सरकार ने अब तक क्या कार्यवाही की है। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम युवा महज इंटरनेट पर पोस्ट लाइक करने के कारण गिरफ्तार होते हैं तो देश की खुफिया एजेंसियां तब कहां सो जाती है जब ये सांप्रदायिक तत्व मासूम बच्चों और युवाओं को नफरत की ट्रेनिंग दे रहे होते हैं। उन्होंने आतंकवाद और सांप्रदायिकता को देश के लिए अभिशाप करार देते हुए कहा कि इन दोनों के खिलाफ देश को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।

साहित्यकारों पुरुष्कार लौटकर अच्छा किया

उन्होंने कहा कि हाल में बहुसंख़्यक वर्ग के बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों ने जिस तरह दादरी मुद्दे पर न्याय का साथ दिया, इससे ये उम्मीदें जागी कि देश को कोई भी ताकत नहीं तोड़ सकती। हम देश के साधु.संतों से आग्रह करते हैं कि मठों और मंदिरों से बाहर आयें और एक साथ सांप्रदायिकता के खिलाफ आवाज़ उठाएं।

मुस्लिम युवकों की रिहाई के लिये क्या किया

मौलाना मदनी ने अपने भाषण में एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि उसने निर्दोष मुस्लिम युवकों की रिहाई के लिये क्या किया। पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बार-बार घोषणा और वादा किया कि निर्दोष लोगों की रिहाई प्रक्रिया में लाई जाएगी, लेकिन न तो निर्दोष लोगों की रिहाई के लिए कोई असरदार प्रयास दिखायी दे रहा है और न अदालत से बाइज़्ज़त बरी लोगों के लिए वित्तीय सहायता और उचित मुआवजा भुगतान की दिशा में कोई कदम किया गया।

उन्होंने कहा ये बैठक आज सरकार से मांग करती है कि वह इस ओर महत्वपूर्ण कदम होगा और आज की बैठक में जो भी मांग किये गए उन पर अमल किया जाए। उन्होंने अलीगढ़ और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की अल्पसंख्यकीय भूमिका की बहाली और बाकी रखने के अपने बयान में मांग की। उन्होंने सरकार से कहा कि वह जमीअत उलमा के  इस प्रस्ताव पर गंभीरता से ध्यान दे।

मौलाना सैयद अरशद मदनी भी हुए सम्मिलित

इस बैठक की विशेष बात यह रही कि इस में प्रख्यात इस्लामिक विद्वान मौलाना सैयद अरशद मदनी भी सम्मिलित हुए जो जमीय्त उलमा-ए-हिंद में मिल्ली मुद्दों पर गठबंधन को बड़ी सफलता मिली है। मौलाना अरशद मदनी ने भी अपने उद्बोधन में आरक्षण और अन्य मांगों पर लाए गए प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिये। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सैयद मोहम्मद उस्मान मनसूरपुरी ने कहा सरकार की यह ज़िम्मेदारी है कि वह सभी वर्गों की समस्याओं का समाधान करे लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार ने लोगों की समस्याएं बढ़ाई हैं।

सलाउटर हाउसो पर न लगाया जाय ताला

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्लाटर हाउस काफी समय से चले आ रहे हैं लेकिन इस सरकार के दौर में प्रदूषण के नाम पर सलाउटर हाउस पर ताला लगाया जा रहा है। हालांकि ये देश की अर्थव्य्वस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए मेरी ये मांग है नये और  वैकल्पिक स्लाटर हाउसों का प्रबंध होने तक इन स्लाटर हाउस को बंद न किया जाए। साथ ही जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने गाय और अन्य समस्याओं को लेकर जारी सांप्रदायिकता और ट्रेनिंग शिविर का खुलासा पर भी संबोधित किया।

मुस्लिम युवक धर्मगुरुओ के संपर्क में रहे 

उन्होने मुस्लिम युवकों से कहा कि वह धार्मिक मुद्दों और दीन की समझ के लिये उलेमाओं से संपर्क करें और खुद के अध्ययन पर भरोसा न करें। धर्म में मनमानी नवाचार और तकफीरी दलों के पैदा होने का यही कारण है और उनकी दुआसे सभा खत्म हुई।

इस बैठक में विभिन्न प्रस्तावों के  प्रकाश में कई वक्ताओं ने  अपने विचार प्रकट किये जिनमें विशेष रूप से नुसरत अली उपाध्य्क्ष जमात-ए-इस्लामी हिंद, आचर्य प्रमोद क्रष्णम, जमीअत उलमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना हकीम उद्दीन कासमी, मौलाना मुफ्ती सलमान मन्सूरपुरी, मौलाना सलमान बिजनौरी, शिक्षक दारुल उलूम देवबनद डॉ मोहम्मद मुहिब्बुलहक, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी मौलाना अब्दुल्ला, अग्रणी शिक्षक दारुल देवबंद मौलाना ह्यातुल्लाह कासमी, अध्यक्ष जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश मोलानाकारी शौकत अली महासचिव जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश आदि ने सम्बोधित किया.

बैठक की अध्यक्षता मौलाना ज़हूरअहमद कासमी ने की जबकि संचालन मौलाना  कारी शौकत अली ने किया। (24city)


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