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शनिवार को झारखण्ड के राँची में हजरत रिसालदार बाबा दरगाह के करीब शरियत बचाओ कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था.

झारखंड एदार-ए-शरिया के बैनर टेल आयोजित इस कांफ्रेंस में इस्लामी स्कॉलर मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने शरीअत की अहमियत बताते हुए कहा कि मुसलमान पानी के बिना तो जी सकते हैं, पर इस्लाम के बगैर नहीं. क्योंकि इस्लाम ने ही उन्हें जिंदगी गुजारने की शरियत दी है. यह शरियत किसी सरकार, किसी पार्टी की बनाई हुई नहीं, बल्कि अल्लाह और उसके रसूल की बनाई हुई है. इसमें किसी तरह का बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. मौसम बदल सकता है, पर जब तक नबी के गुलाम जिंदा हैं, शरियत नहीं बदल सकती। इसे बदलने वाले जरूर बदल जाएंगे.

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन तलाक के मामले में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भेजा हलफनामा 30 दिनों के अंदर वापस लें, नहीं तो मुस्लिम नौजवान दिल्ली आकर प्रदर्शन करेंगे. हम डरने वाले नहीं हैं, जेलें कम पड़ जाएंगी. उन्होंने लोगों से हाथ उठाकर शरियत बचाने की खातिर जेल जाने को तैयार रहने का आह्वान किया.

इसके साथ ही उन्होंने देश की सरहदों की सुरक्षा के बारे में कहा कि सरहद को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो सिर्फ एक बार हमारे नौजवानों की सेना में 30 फीसदी बहाली कर दो. 42 घंटे के अंदर लाहौर से इस्लामाबाद तक तिरंगा लहराता नजर आएगा.


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