Muslim Womens Body Slams Jamiat On Personal Law Stand

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में बदलाव को लेकर दिए गए जवाब की मुस्लिम महिला संगठनों ने तीखी आलोचना की है। जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड किसी संस्था या व्यक्ति की देन नहीं है, बल्कि कुरान के आधार पर है। इसलिए इसमें सुप्रीम कोर्ट भी किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है।

जमीयत के इस तर्क का तीखा विरोध करते हुए भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की जाकिया सोमान ने कहा, ‘असल में लैंगिक समानता के मामले में कुरान और संविधान की भाषा में कोई अंतर नहीं है। लेकिन समाज के कुछ तत्व इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।’ भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के कुल 70,000 सक्रिय सदस्य हैं। संगठन ने कहा कि जमीयत के इस तर्क ने महिलाओं की ओर से की जा रही अधिकारों की मांग को चोट पहुंचाने का काम किया है।

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भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने पिछले साल ‘मुस्लिम महिलाओं को मिले समान अधिकार’ याचिका पर महिलाओं से हस्ताक्षर करवाए थे। इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया था। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस एके सीकरी और आर भानुमति ने सुनवाई की थी। बेंच ने इस मामले में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद को पार्टी बनाए जाने पर सहमति जताई थी और उससे जवाब मांगा था। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल और नैशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी से भी जवाब मांगा था।

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