लखनऊ: राजनेता बीफ को मुद्दा बनाकर सियायत करते हैं। वोट के खातिर वे बीफ को मुद्दा बनाकर अपनी-अपनी सियासी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं उन्हें शाहजहांपुर के सलमान से कुछ सीखना चाहिए। सलमान दो वक्त की रोटी के लिए अखबार बांटने का काम करता है, लेकिन असल में वो गायों के लिए जीता है।

25 वर्षीय सलमान ने अपना जीवन गायों के नाम समर्पित कर दिया है। सलमान नालों में फंसी गायों को बाहर निकालता है। जख्मी व बीमार गायों का इलाज कराता है। जब हर कोई सो रहा होता है तब सलमान ठिठुरती रातों में सड़कों पर लावारिस घूमने वाली गायों की सेवा कर रहा होता है। सलमान गायों के लिए जूट के बोरे की रजाई बनाई है। बाद में वो गायों की पीठ पर बांध देता है ताकि उन्हें ठंड से राहत मिल सके। ऐसा करने के पीछे सलमान की न तो पुरस्कार पाने और न ही नाम कमाने की इच्छा है।

सलमान कहते हैं कि सेवा का कोई धर्म नहीं होता। कोई रूप नहीं होता। बस कुछ होता है तो सिर्फ सेवा का जज्बा और इंसानियत। सलमान ठिठुरती रात में घर से निकलता है और गायों व बछड़ों को ठंड से बचाने के लिए सड़क पर घूमता रहता है। इसके लिए सलमान ने सब्जी मंडी से सौ से ज्यादा बोरे खरीद कर लाए हैं। इन बोरों को उसने सुतली से बांधकर रजाई का रूप दे दिया है।

गली-मोहल्लों और नुक्कड़ों में घूमते हुए जहां भी सलमान को गाय, बैल, बछड़े मिल जाते हैं, वह उनकी पीठ पर बोरेनुमा रजाई को बांध देता हैं। इससे गायों को ठंड नहीं लगती और सलमान को गौ सेवा करने का सुकून मिलता है। (News24)


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