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तौकीर रज़ा खान के देवबंद में कदम रखने की आहट साउथ अफ्रीका से लेकर जिम्बावे तक सुनाई दी गयी है लेकिन जहाँ भारत के कुछ उलेमा उनका समर्थन कर रहे है वहीँ दुनियाभर से तौकीर रज़ा के विरोध में स्वर उठ रहे है। आइए देखते है दुनियाभर में इस मुद्दे को लेकर उलेमाओ की क्या क्या राय है।

साऊथ अफ्रीका

साऊथ अफ्रीका के मौलाना अरशद इकबाल ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि मौलाना तौकीर मियां का देवबंद जाना गलत फैसला है तथा जो बात सुबहानी मियां ने कही है उस पर अमल होना चाहिए और अगर ऐसा ना हो तो उन्हें उर्स में मंच पर साथ ना बैठाया जाए। गौरतलब है की सुबहानी मियां ने कहा था की अगर तौकीर मियां देवबंद जाने पर तौबा नही करते तो खानदान उनका बायकाट करें।

जिम्बाब्वे

मौलाना अरशद को समर्थन देते हुए जिम्बाब्वे के मुफ़्ती कासिम ने वही बात कही हिया जो सुबहानी मियां ने अपने बयान में कही थी की अगर तौकीर रज़ा तौबा नही करते है तो उन्हें दरगाह में ना घुसने दिया जाए.

यूनाइटेड किंगडम

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर हद से ज्यादा कोहराम छाया हुआ है मामला सिर्फ देवबंद और बरेली का ना रहकर लोगो के अकीदे से जुड़ गया है जिसके कारण तमाम फिरके के लोग इस मुद्दे में दिलचस्पी ले रहे है. यूनाइटेड किंगडम के मुफ़्ती अरशद रज़ा ने मौलाना तौकीर ने यहाँ तक लिख दिया की अगर वो (तौकीर रज़ा) तौबा नही करते है तो दरगाह आला हजरत खानदान को शादी-मय्यत तक में शामिल न हो।

भारत

नबीरे आला हजरत मौलाना मन्नान रजा खां मन्नानी मियां ने मौलाना तौकीर रजा खां का नाम लेकर पांच बार लाहौल पढ़ने का आह्वान मुसलमानों से किया है। कोहराम न्यूज़ को मिली जानकारी के अनुसार मन्नानी मियां ने कहा है की तौकीर रजा दरगाह आला हजरत खानदान के आलिम-मुफ्ती नहीं हैं। यह सियासी कदम है। उन्हें इस्लाम की कोई जानकारी नहीं। आला हजरत ने जाहिल से तकरीर कराना भी गलत बताया है लेकिन इसके बाद भी इस्लामियां मैदान पर उर्स-ए-रजवी के मंच से मौलाना तौकीर रजा खां से तकरीर कराई गई। मुसलमान मस्जिद-मदरसों में एकत्र होकर पांच बार मौलाना तौकीर रजा खां का नाम लेकर लाहौल पढ़ें।


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