देश की आर्थिक नगरी मुंबई के पुलिस कमिश्नर दत्ता पडसलगीकर ने पुलिस फ़ोर्स में मुसलमानों की कमी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस फ़ोर्स में मुसलमानों का शामिल होना बहुत आवश्यक है.

उन्होंने कहा कि उन्हें जरुरी प्रशिक्षण देने के लिए विभाग हर तरह से सहयोग करेगा, हम उनकी योग्यता और क्षमता को अच्छी तरह से परिचित हैं. अंजुमन इस्लाम के जलसे में शामिल हुए पडसलगीकर नेकहा कि कुछ गलत लोग बच्चों को बहकाने का काम करते हैं, लेकिन इसमें पूरे समाज को गलत नहीं ठहराया जा सकता। हालाँकि इसमें बदनामी जरूर होती है.

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मुस्लिम युवकों के नशीली दवाओं के इस्तेमाल में वृद्धि पर भी उन्होंने अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा. अंजुमन इस्लाम के अधयक्ष जहीर काजी ने मुस्लिम नौजवानों की प्रशिक्षण के लिए हर तरह से सहयोग देने की गुजारिश की.

वहीँ पूर्व विधायक सोहेल लोखनडवाला ने कहा कि 1992-93 के खूनी दंगे हमें याद है. आज माहोल में जबरदस्त बदलाव आया है और फ़ोर्स में अच्छे और खुले दिमाग के अधिकारी आए हैं जो पुलिस और मुस्लिम समुदाय के बीच की दरार को भरने कि कोशिश कर रहे हैं.

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