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बैंकों के बाहर अब भी भीड़ कम होती नजर नहीं आ रही हैं. गाँवों और कस्बों में अब भी हालातों में कोई सुधार नहीं हैं. ऐसे में बैंक कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन का व्यवहार भी आम जनता के लिए मुसीबत बना हुआ हैं. इस दौरान बैंककर्मी और पुलिसकर्मी पहले अपने परिचितों को लाभ पहुंचा रहे हैं. ऐसे में एक फौजी को इन हरकतों का विरोध करना महंगा पड़ गया.

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सोमवार को मुरैना के अंबाह कस्बे में फौजी दिनेश अपने भाई की तेरहवीं के लिए स्थानीय SBI ब्रांच से पैसे निकालने पहुंचे थे. इस दौरान वे बैंक के बाहर लम्बी लाइन में खड़े रहे और अपनी बारी का इन्तेजार करते रहे. लेकिन जब उनका नंबर आया तो वहां तैनात पुलिसकर्मी ने अपने किसी मित्र को बगैर लाइन में लगाए फौजी के आगे खड़ा कर दिया.

 ऐसे में फौजी ने इस बात का विरोध किया तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी एसडी मिश्रा और थाना प्रभारी ने मारपीट शुरू कर दी. पुलिस की बेवजह पीटाई से वहां मोजूद भीड़ आक्रोशित हो गई. जिसके बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए भीड़ पर लाठी चार्ज तक करना पड़ा.
इस मामले की शिकायत लेकर फोजी उच्चधिकारियों के पास पहुंचा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. अंत में देश के दुश्मनों से लड़ने वाला फोजी हार गया और बिना पैसे ही उसे अपने गांव वापस लौटना पड़ा.

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