VIDEO: सुन्नी कांफ्रेंस, मुसलमान नहीं हो सकता दहशतगर्द

मुरादाबाद में मंगलवार को ईदगाह में सुन्नी बरेलवी कांफ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमे आतंकवाद के साथ ही नबी ए करीम (सल्ल.) की शान में गुस्ताकी करने वालों के खिलाफ भी आवाज उठाई गई. इस कांफ्रेंस का आयोजन दरगाह ए आला हजरत के सज्जदानशीन की और से किया गया हैं.

Screenshot_58 आज ईदगाह मैदान में दरगाह आला हजरत के सरबराह हजरत अल्लामा सुब्हान रजा खां उर्फ सुब्हानी मियां की सरपरस्ती व सज्जादानशीं अहसन मियां की अध्यक्षता में कांफ्रेंस हुई। सुब्हानी मियां ने कहा कि तरह तरह के इल्जाम लगाकर मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। पूरी दुनिया के इस रास्ते पर चलने से विश्व शांति को खतरा पैदा हो गया है। आतंकी हमलों से न मस्जिदें और खानकाहें सुरक्षित हैं और न ही मंदिर। आतंकवाद का ये तांडव पूरी दुनिया को अपने कब्जे में ले चुका है। आला हजरत ने वर्षों पहले ही यहूदी व वहाबी आतंकवाद की ओर इशारा कर दुनियाभर में अपना पैगाम पहुंचा दिया था।

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कई अन्य उलमाओं ने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद स., ख्वाजा गरीब नवाज व आला हजरत को मानने वाले आतंकवादी नहीं हो सकते। वक्त की आवाज है कि समाज में नफरत की आग घोलने व आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सुन्नी मुसलमान एकजुट होकर आवाज बुलंद करें। कांफ्रेंस में पैगम्बर-ए-इस्लाम के खिलाफ टिप्पणी करने वाले शख्स को फांसी की सजा देने का कानून बनाने की जरूरत पर बल दिया गया। तलाक जैसे मसलों पर समाज में जागरूकता लाने की बात कही गई।

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कुरीतियों को दूर करने, बच्चों को तालीम दिलाने व दहेज प्रथा पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। उलमाओं ने कांफ्रेंस को वक्त की जरूरत करार देते हुए दुनियाभर में अमन- शांति व भाईचारे का पैगाम पहुंचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का आह्वान किया।

कांफ्रेंस का आगाज कारी रिजवान ने कुरआन की तिलावत से किया। सलाम के बाद जुहर की नमाज व मुल्क-ओ-मिल्लत की कामयाबी, खुशहाली व तरक्की की दुआ की गई। मुफ्ती मुहम्मद अय्यूब खां नईमी, मुफ्ती मुईनुद्दीन, नजीब मियां- मारहरा शरीफ, सैयद अमन मियां, सैयद सुहेल मियां, सैयद गुलजार मियां, सैयद सुल्तान मियां- अजमेर, सैयद फखरुद्दीन अशरफ- किछौछा, हस्सान मियां व अनवर मियां- बरेली, राशिद मियां- भैंसोड़ी शरीफ के अलावा दिल्ली, देवा शरीफ, कलियर शरीफ, उड़ीसा, जबलपुर के सज्जादगान ने शिरकत की।

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हजारों की संख्यां में आयें देश भर से लोगों के कारण ईदगाह का मैदान खचाखच भरा गया. देशभर की बड़ी खानकाहों से पहुंचे सज्जादानों आतंक के खिलाफ अपनी तकरीरों में आतंकवाद को इस्लाम के खिलाफ बताया. तकरीरों में स्पष्ट रूप से कहा गया कि मुसलमान कभी दहशतगर्द नहीं हो सकता. गिनती के चंद लोगों की सोच घिनौनी हो सकती है, लेकिन इसे पूरी कौम पर नहीं थोपा जा सकता.

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तिलावत ए कुरान से शुरू हुई तकरीर दरुदों सलाम के बाद दुआ पर खत्म हुई. दुआ में देश में अमन, शांति और खुशहाली के लिए हाथ उठाये गए.

 


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