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मुरादाबाद: केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और समान नागरिक संहिता को मुसलमानों के सिरों पर थोपने के लिए उलमा ए इस्लाम संभल के बैनर तले शहर के मुसलमानों ने शांतिपूर्ण रैली निकालकर मोदी सरकार का विरोध किया. साथी ही राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मुस्लिम पर्सनल ला में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करने की मांग की.

शुक्रवार को बाद नमाज ए जुम्मा हजारों मुसलमानों ने बड़ी मस्जिद हिलाली सराय से मौलाना मुहम्मद मियां कासमी के नेतृत्व में एक मौन जुलुस निकाला, जो शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए चन्दौसी चौराहे पर जनसभा में परिवर्तित हो गया.

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इस दौरान जनसभा में मौलाना मुहम्मद मियां ने कहा कि हमारे देश की विशेषता उसकी अनैकता में एकता है जबकि समान नागरिक संहिता हमारी इस विशेषता को समाप्त करन देने वाला कानून है. जहां तक मुस्लिम पर्सनल ला का मामला है तो यह अल्लाह तआला का कानून है. जिसे कोई व्यक्ति या दुनिया, कोई शक्ति न तो बदल सकती है और न ही हस्तक्षेप का कोई अधिकार रखती है. इसलिए समान नागरिक संहिता का पुरजोर विरोध करते हैं और करते रहेंगे.

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जनसभा समाप्त होने के पश्चात फिर एडीएम आरपी यादव को माननीय राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया. ज्ञापन में देश के अल्पसंख्यकों और अन्य सम्प्रदायों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने, मुस्लिम पर्सनल ला में किसी भी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करने, देश में बेरोजगारी दूर करने, प्रत्येक व्यक्ति को न्याय दिलाने, शराब पर पाबंदी लगाने, बच्चों को निशुल्क शिक्षा, बूढ़ों, बेवाओं, बीमारों और विकलांगों को पेंशन देने की मांग की गई.

मीडिया से मुखातिब होते हुए मिशन आफ दावते इस्लाम एंड पीस के संयोजक मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क ने कहा, तीन तलाक को समाप्त करने और एक समान कानून बनाने की साजिश की जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान में इसकी वकालत की है जो हैरत की बात है. यकसा सिविल कोर्ट और मुस्लिम पर्सनल ला में मुदाखिलत को मुसलमान किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते. मुसलमान किसी कुर्बानी से भी नहीं हिचकिचाएगा. लिहाजा राष्ट्रपति इस मामले में सरकार को बाध्य करें कि वह ऐसी हरकत से बाज आएं.

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