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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वकांक्षी ‘स्वच्छ भारत योजना’ छत्तीसगढ़ के किसानों के लिया आफत बन गई हैं. इस महत्वकांक्षी योजना का जिम्मा सरपंचों पर सोंपा गया हैं. योजना के अंतर्गत तयशुदा समय में शौचालय का निर्माण पूरा करवाने का नियम हैं.

इसी नियम के चलते छत्तीसगढ़ के कई गांवों के सरपंच कर्ज के जाल में फंस गए हैं और उन्हें धमकियां मिल रही हैं. परिणामस्वरूप बस्तर के कांकेर जिले में स्थित 11 गांवों के सरपंचों ने आत्महत्या कर लेने की धमकी दी है. इन सरपंचों का कहना है कि अगर एक महीने के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है, तो वे खुदकुशी कर लेंगे.

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‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सरपंचों ने शौचालय बनवाने के लिए कर्ज ले लिया।. लेनदारों से वादा किया कि जैसे ही जिला प्रशासन की ओर से शौचालय निर्माण का फंड जारी होगा, भुगतान कर दिया जाएगा. इन गांवों को चार महीने पहले ही खुले में शौच से मुक्त ग्राम घोषित किया गया लेकिन इस उपलब्धि के बावजूद भी सरपंच घर से बाहर नहीं निकल पा रहे.

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डोंगरकट्टा गांव के सरपंच महर सिंग उसेंडी ने बताया, ‘मेरे गांव को 7 अप्रैल को ही खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया था. प्रशासन ने गांव में 299 शौचालयों के निर्माण की मंजूरी दी थी. मुझे जनपद सीआई ने बताया था कि हर घर में एक शौचालय का होना अनिवार्य है. गांव में 49 घर ऐसे हैं, जहां शौचालय नहीं हैं. मुझसे कहा गया कि मैं उन्हें शौचालय बनवाने का सामान मुहैया करा दूं. मुझे आश्वासन दिया गया कि भुगतान बाद में कर दिया जाएगा. पिछले एक साल से मेरे सिर पर 23 लाख का कर्ज है.’

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