उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाक़े में लातूर की तरह पानी की क़िल्लत के कारण केंद्र सरकार ने ट्रेन से पानी भेजा था. पानी से लदी इस ट्रेन को कोटा से महोबा के लिए रवाना किया गया था, लेकिन जब ये झांसी ही पहुँची थी तब राज्य सरकार ने इसे लेने से इंकार कर दिया.

महोबा के ज़िलाधिकारी वीरेश्वर सिंह के अनुसार इस इलाके में पानी की कमी है लेकिन इतनी भी नहीं है कि बाहर से पानी मँगाया जाए. उन्होंने आगे बताया कि गांवों और शहरों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए पास के ट्यूबवेलों से टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है.

वीरेश्वर सिंह का कहना है कि दो सौ तीन सौ मीटर की दूरी पर ट्यूबवेल से पानी पहुंचाना ज़्यादा आसान है जबकि बीस तीस किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन से पानी पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी समस्या है.

दरअसल बुंदेलखंड इलाक़े के कुछ भाजपा सांसदों ने लातूर की तरह बुंदेलखंड में भी ट्रेन से पानी पहुंचाने की मांग की थी, जिसे रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने मंज़ूर कर लिया था. लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे ग़ैरज़रूरी बताकर इसके औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया है.


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