पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी कूड़ाघर में तब्दील हो गया है। आठ दिन हो गए शहर से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है, जिसकी वजह से बनारस के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह है शहर के पास का वो डंपिंग ग्राउंड जहां पर बनारस का कूड़ा जलाया जाता था, लेकिन कूड़ा जलाए जाने की वजह से डंपिंग ग्राउंड के पास वाले गांव के लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी।

बनारस में पिछले आठ दिनों से कूड़ा नहीं उठाया गया और न ही कोई सफाईकर्मी दिखा। पूरा वाराणसी शहर गंदगी और कूड़े से बदबूदार हो गया है। शहर का कोई भी हिस्सा कूड़े की दुर्गन्ध से अछूता नहीं है। बात गौदौलिया की हो या विश्वप्रसिद्ध अस्सी की या प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के रास्ते की, जहां नजर जाएगी हर जगह कूड़ा ही दिखेगा। बनारस की पॉश कॉलोनी रविन्द्रपुरी में भी हर ओर कूड़ा ही कूड़ा नजर आ रहा है। एक हफ्ते से अधिक का वक्त हो गया है शहर वालों को गंदगी की ये समस्या झेलते-झेलते, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है।

बनारस की ऐसी हालत हुई तो क्यों हुई:

दरअसल ये सब हुआ वाराणसी के पास में रमना गांव के लोगों के विरोध की वजह से। वाराणसी का कूड़ा रमना गांव में डंप किया जाता था। डंपिंग की अभी तक कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है और शहर के कूड़े को रमना गांव में जलाया जाता था। गांववालों को कूड़े के धूंए से सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसका गांववालों ने विरोध किया।

अभी तक रमना गांव के लोगों और नगर निगम के बीच कूड़े को गिराने को लेकर कोई बीच का रास्ता नहीं निकल सका है। गांव वालों के विरोध के बाद वाराणसी नगर निगम ने करसड़ा में एसटीपी बनवाकर कूड़े को डंप करने का प्रस्ताव था, लेकिन वो भी बात अधूरी ही रह गई। वाराणसी के बदबूदार होने के बाद आरोप प्रत्यारोप की राजनीति भी शुरू हो गई है, वाराणसी के मेयर आरोप लगा रहे हैं कि प्रदेश सरकार उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रही है।

वाराणसी के लोगों को अब बीमारियों का डर सताने लगा है तो रमना गांव के लोग पहले से ही सांस और त्वचा की बीमारियों से जूझ रहे हैं। देखना होगा कि कब पीएम के स्वच्छ भारत का सपना उनके खुद के संसदीय क्षेत्र में पूरा हो पाता है। (News 24)


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