नोटबंदी की मार तो सभी को पड़ी थी लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुकसान दिहाड़ी श्रमिकों को झेलना पड़ा. जो अपने रोजगार और नौकरियों से हाथ धो बैठे. दिसंबर-2016 में समाप्त तीन महीनों के दौरान यानि नोटबंदी के दौरान 1.52 लाख लोगों को काम नहीं मिला.

श्रम मंत्रालय के अधीन काम करने वाले लेबर ब्यूरो की विभिन्न उद्योगों में रोजगार की स्थिति पर तिमाही रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अक्टूबर 2016 के मुकाबले एक जनवरी 2017 तक आइटी, ट्रांसपोर्ट, मैन्यूफैक्चरिंग समेत आठ सेक्टरों में 1.52 रोजगार कम हुए.

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सर्वे के अनुसार इस दौरान 1.68 लाख नये पूर्णकालिक कर्मचारी जुड़े. जबकि 46 हजार अंशकालिक कर्मचारी कम हुए. इस दौरान अनुबंधित और नियमित कर्मचारियों की संख्या क्रमश: 1.24 लाख और 1.39 लाख बढ़ी.

विनिर्माण, व्यापार, परिवहन, आईटी-बीपीओ, शिक्षा और स्वास्थ्य ने 1.23 लाख श्रमिकों की वृद्धि के साथ बड़ा योगदान दिया जबकि निर्माण क्षेत्र में गिरावट आयी. जिन क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि हुई उनमें विनिर्माण, व्यापार, परिवहन, आईटी..बीपीओ, शिक्षा और स्वास्थ्य प्रमुख रहे। रखरखाव और रेस्त्रां क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं आया। स्वरोजगार श्रेणी में इस दौरान 11,000 की वृद्धि हुई

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