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कश्मीर में हाल ही में पेलेट गन से घायल हुए 21 वर्षीय नौजवान रियाज़ अहमद शाह की मौत के बाद कश्मीर घाटी एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ चुकी हैं. एटीएम सुपरवाइजर रियाज अहमद की आरोप CRPF के जवान पर लगा हैं. रियाज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ हैं कि उसकी मौत पेलेट गन से हुई हैं. कित्सकों ने बताया कि उनके पेट में 300 छर्रे पाए गए.

रियाज़ अहमद की मौत के बाद वित्त मंत्रालय में तैनात आईएएस अधिकारी रुवेदा सलाम ने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर ‘पाखंडी’ होने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “वोटरों को लुभाने के लिए हरे रंग पहनने वालों ने घाटी को लाल रंग में रंग दिया और अब वो उसी मजहब पर सवाल उठा रहे हैं जिसका नकाब पहनकर वो अपने बुरे कर्मों को छिपाते हैं. पाखंड का इससे बुरा उदाहरण नहीं हो सकता.”

उनके फेसबुक कमेंट पर सोपोर के एसपी हरमीत सिंह मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अपनी मौजूदा प्रशासनिक सेवा छोड़कर अलगाववादियों से मिल जाना चाहिए। मेहता ने सलाम को “अज्ञानी महिला” बताते हुए लिखा, “सरकार को आपके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि आप लोक सेवक होकर भी सरकार के खिलाफ जहर उगल रही हैं. बेहतर आप इस्तीफा देकर अलगाववादी गुट में शामिल हो जाएं.”

जवाब में सलाम ने कहा कि मेहता ये न बताएं कि उन्हें क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए. सलाम ने कहा, “मैं अपना हर शब्द तौल के बोल रही हूं और मैंने जो लिखा है वो सच है. मैं उन लोगों के रवैए से आहत हूं जो मासूमों को बचाने की कसमें खाते हैं लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने से भागते हैं.”

सलाम ने लिखा कि वो जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा “अज्ञानी महिला” कहे जाने से आहत नहीं हालांकि उनकी कमेंट से बदमिजाजी और लैंगिक पूर्वाग्रह झलकता है. सलाम 2013 में जम्मू-कश्मीर की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनी थीं. 2015 में वो आईएएस में चुन ली गईं.


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