अब तक आपने मीडिया को बलात्कार एवं दुष्कर्म पीडि़ता की मदद तथा आरोपी पक्ष के खिलाफ आवाज को बुलन्द करते हुऐ देखा सुना होगा लेकिन मथुरा में मीडिया के कई प्रमुख समाचार पत्र के पत्रकारों ने काली कमाई की चाहत में कोर्ट के निर्णय को छिपाते हुऐ पीडि़ता छात्रा द्वारा करीब 1 साल पूर्व दिऐ गये शपथ पत्र के आधार पर आरोपी वरिष्ठ पत्रकार कमलकान्त उपमन्यु को निर्दोश बताकर खबर के साथ ही बलात्कार का एक नया इतिहास रचा है।
जबकि मथुरा न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में पीडि़ता छात्रा/आरोपी पक्ष तथा आपत्ति कर्ता को उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखकर विचाराधीन याचिका के निस्तारण होने तक सुनवाई पर रोक लगाई गई है। उक्त मामला हाईकोर्ट इलाहाबाद तथा मथुरा न्यायलय में विचाराधीन है के बावजूद प्रमुख समाचार पत्रों द्वारा एक वर्ष पूर्व के शपथ पत्र के आधार पर ही आरोपी बलात्कारी को रविवार 7 फरवरी 2016 को निर्दोश का करार दे दिया गया।
लेकिन ‘विषबाण’ नामक समाचार पत्र ने उक्त खबर की सच्चाई को प्रकाशित कर पत्रकारिता की साख को बनाये रखा गया है। जिसके लिये वह धन्यवाद का पात्र है।
 
निवेदक 

तनुज अग्रवाल
समाजसेवक


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