जहाँ एक तरफ देश में अल्पसंख्यकों पर भीड़ द्वारा हमलो की प्रतिदिन कोई ना कोई खबर आरही है वहीँ विदेशी मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा की जा रही है की भारत में विकास के मुद्दे की जगह हिन्दुत्व ने ले ली है.

जिन लोगो पर भीड़ द्वारा हमले किये जा रहे है उनमे पीड़ित 90% से अधिक मुस्लिम समुदाय से सम्बन्ध रखते है अखलाक से शुरू हुआ यह नफरत का खेल लगातार जारी है, हालाँकि इन हमलो के खिलाफ समाज के बुद्धिजीवी वर्ग ने अपना रोष प्रकट किया लेकिन उसके बाद भी ना तो ऐसी वारदातों पर सरकार अंकुश लगाने में कामयाब हो पायी ना ही हिंदूवादी संघटनो ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील को माना.यह सब देखते हुए आखिरकार लोगो को खुद सड़कों पर उतरना पड़ा.भीड़ तंत्र द्वारा होने वाली हत्याओं के विरोध में आवाज़ उठनी शुरू हो गयी है हालाँकि इस आवाज़ के उठने से पहले काफी बेगुनाहों की बली चढ़ाई जा चुकी है.

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आज मऊ में बेहद विशाल धरना दिया गया जिसमे भीड़ द्वारा मारे जाने के प्रति बेहद नाराज़गी दिखाई दी, तक़रीबन हजारों की भीड़ इस धरने में भाग लेने के लिए अपने घरों से निकलकर धरना स्थल तक पहुंची.

मऊ नागरिक मंच द्वारा आयोजित यह विशाल धरना म़ोब लिंचिंग की घटनाओं के विरोध में आयोजित किया गया जिसमे शहर से लगभग सभी गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और भीड़ तंत्र द्वारा होने वाली घटनाओं को देश का दुर्भाग्य बताया.

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