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जवाहर बाग मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि मथुरा के जवाहर बाग में दो साल से अधिक समय तक अतिक्रमणकारियों का कब्जा क्यों रहने दिया गया. जबकि 2014 में इस सार्वजनिक पार्क का इस्तेमाल केवल दो दिन तक प्रदर्शन के लिए करने की अनुमति दी गयी थी.

इस मामलें में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति रवींद्रनाथ कक्कड़ की खंडपीठ ने वहां अतिक्रमण और उससे संबंधित कार्रवाई को लेकर मथुरा के जिला प्रशासन और राज्य सरकार के बीच हुए संवाद का ब्योरा भी मांगा हैं. याचिकाकर्ता भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने घटना के सिलसिले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि रामवृक्ष यादव को उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का अनुचित समर्थन हासिल था.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया, ‘‘राज्य सरकार ने रामवृक्ष यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जबकि जवाहर बाग पर कब्जे की अवधि के दौरान उसके और उसके अनुयायियों के खिलाफ 16 प्राथमिकियां दर्ज की गयी थीं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसने 2014 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी के एक शीर्ष नेता के लिए व्यापक प्रचार किया था और उसके एवज में राज्य सरकार जाहिर तौर पर उसे विशालकाय सार्वजनिक पार्क सौंपने की कोशिश कर रही थी.’’


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