कांग्रेस और शिवसेना के साथ मिल जाने और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के अज़ीम इत्तेहाद द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हाथ मिला लेने से मालेगांव में महापौर और उपमहापौर के चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी के ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लिए दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई.

दरअसल पहली बार एआईएमआईएम किंगमेकर की भूमिका में है लेकिन दुविधा ये है कि दोनों ही और हिंदुत्व पार्टिया है. चुनाव नतीजे आने के बाद माना जा रहा था कि बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन होगा लेकिन अज़ीम इत्तेहाद द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हाथ मिला लेने के बाद ओवैसी की पार्टी के लिए नई मुसीबत पैदा हो गई है.

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इस बार चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने 28 सीटें जीतीं और एकल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. वहीँ  शिवसेना ने 13 सीटें जीतीं और 14 जून को होने वाले महापौर और उप चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ समझौता किया. लेकिन चुनाव में जीतने के लिए उनकी संयुक्त संख्या अभी भी 43 की जादुई संख्या से कम है.

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दूसरी ओर, कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन के बाद, एनसीपी के और जनता दल (सेक्युलर) के अजीम इत्तेहाद और भाजपा ने भी घोषणा की कि वे महापौर और उप महापौर चुनावों में एक-दूसरे का समर्थन करेंगे. अजीम इत्तेहाद में एनसीपी, जनता दल (एस) और 01 उम्मीदवार सहित 27 सदस्य हैं. ऐसे में भाजपा के 9 सदस्यों को जोड़कर, इस समूह के पास 36 सदस्यों का समर्थन होगा.

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एआईएमआईएम ने पहले ही घोषणा की  हुई है कि पार्टी की नीति के मुताबिक यह “सांप्रदायिक” भाजपा और शिवसेना के साथ ही “भ्रष्ट” कांग्रेस से समान दूरी बनाए रखेगी.


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