महाराष्ट्र के मालेगांव शहर के आठ पुलिस थाने अब अपराधों का रेकॉर्ड रखने के अलावा पिछले साल मार्च महीने से एक और रजिस्टर मेनटेन कर रहे हैं। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले मालेगांव में पुलिस के इस रजिस्टर में गाय और बैलों का डीटेल ब्योरा दर्ज है। पिछले साल ही गोमांस पर बैन लागू किए जाने के बाद से इस रजिस्टर को मेनटेन किया जा रहा है। मालेगांव के सभी 800 गाय-बैलों का जिक्र इस रजिस्टर में है।

महाराष्ट्र में बीफ बैनपुलिस का कहना है कि इससे पशुओं को मारने के मामलों में कमी आई है और सांप्रदायिक सौहार्द भी बढ़ा है। महाराष्ट्र पशु संरक्षण कानून, 1976 के तहत राज्य में गायों को मारने पर रोक है। इस कानून में 1995 के संशोधन को मार्च, 2015 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद बैल और सांड़ों को मारने पर भी रोक लगा दी गई।

पुलिस के रजिस्टर में इन जानवरों और उनके मालिकों का पूरा ब्योरा दर्ज है, जैसे- पालतू पशु का रंग और नस्ल और उसे पालने का कारण। मालिक की पशु के साथ एक तस्वीर भी रजिस्टर में लगाई जाती है। पशु के मालिक को यह अंडरटेकिंग भी देनी होती है कि उसके खरीदे या बेचे जाने या मारे जाने की जानकारी वह पुलिस थाने को देगा।

सभी समुदायों के लोगों को यह निर्देश दिया गया है कि वह अपने पालतू पशु की जानकारी नजदीकी पुलिस थाने में दर्ज कराएंगे। पुलिस का दावा है कि इससे किसी तरह के भेदभाव की आशंका खत्म हुई है और समुदायों के बीच भरोसा भी बढ़ा है। पुलिस उपाधीक्षक सुनील कडासने ने बताया. ‘गोमांस पर कड़े प्रतिबंध की सूरत में सभी समुदायों के धार्मिक नेता सहयोग के लिए आगे आए हैं।’

उन्होंने दावा किया कि पिछले साल मार्च में इस रजिस्टर की शुरुआत के बाद से मालेगांव में पशुओं की चोरी या उसके मारे जाने का एक मामला भी दर्ज नहीं किया गया है हालांकि पड़ोसी जिलों से होने वाली अवैध गतिविधियों से पुलिस को रूबरू होना पड़ रहा है। साभार: नवभारत टाइम्स


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