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मुंबई: अन्न पैदा कर देश का पेट भरने वाला राज्य का किसान आत्महत्या कर रहा हैं वहीँ हमारे सियासतदां कथित देशभक्ति का मुजाहिरा फिल्म ‘ए दिल हैं मुश्किल’ की रिलीज़ को लेकर दिखा रहे हैं. मुख्यमंत्री देवेन्द्र देवेन्द्र फडनवीस से लेकर शिवसेना के उद्धव ठकरे से होते हुए MNS प्रमुख राज ठाकरे की देशभक्ति देश का पेट भरने वाले इन किसानों के आत्महत्या करने के दौरान कहा गायब हो जाती हैं ?

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राज्य में अच्छे मानसून के बावजूद इस वर्ष मराठवाड़ा में जून के पहले सप्ताह से लेकर अक्टूबर तक कुल 342 किसान आत्महत्या कर चुके है. वहीँ जनवरी से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक कुल 838 किसानों ने आत्महत्या की हैं. यह आकड़ा पिछले साल के 778 आत्महत्या करने वाले किसानों से ज्यादा हैं.

जून से लेकर अक्टूबर तक मराठवाड़ा के आठ जिलों में बीड में सबसे ज्यादा 93 किसानों ने आत्महत्या की. इसके अलावा नांदेड़ और उस्मानाबाद में 58 किसानों ने आत्महत्या की हैं. आत्महत्या के पीछे किसानों की खराब वित्तीय हालत, सूखा, बैंक का कर्ज चुकाने में असमर्थता बताई जा रही हैं.

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बीड के डेप्युटी कलेक्टर चंद्रकांत सूर्यवंशी ने कहा कि 2014 की अपेक्षा में 2015 में ज्यादा किसानों ने आत्महत्याएं कीं. उस वक्त क्षेत्र में पानी की भयंकर कमी थी. इस बार बारिश अच्छी हुई इसलिए हमें आत्महत्या की संख्या कम होने की उम्मीद थी.’


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