मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने मोदी सरकार को बड़ा झटका देते हुए मवेशियों के वध के लिए बिक्री को पूरे देश में बंद करने के फैसले पर 4 हफ्तों की रोक लगा दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से इस फैसले पर चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील से सहमति जताई कि खान-पान की आदत हर व्यक्ति का निजी अधिकार है. ये आदेश मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के जस्टिस एमवी मुरलीधरन व सीवी कार्तिकेयन ने सुनाया है. कोर्ट ने कहा, ‘खाने को चुनना सबका व्यक्तिगत अधिकार है और किसी को भी उसे तय करने का हक नहीं है.’

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि केंद्र के नए नियम पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA) के ही खिलाफ हैं. इस ऐक्ट के सेक्शन 28 में कहा गया है कि किसी धर्म या समुदाय की जरूरत के मुताबिक किसी पशु की हत्या करना अपराध नहीं माना जाएगा.

याचिका में दावा किया गया है कि PCA में पशु हत्या के साथ-साथ उन्हें बेचने की भी इजाजत दी गई है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि केंद्र को ऐसे नियम बनाने का कोई अधिकार नहीं है. याचिकाकर्ता के अनुसार, नए नियम संविधान की धारा 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं.

गौरतलब है कि केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर पशु बाजार में बूचड़खानों के लिए जानवरों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी. नए प्रावधानों के तहत गाय, बैल, सांड, बछिया, बछड़े, भैंस और ऊंट को बाजार लाकर हत्या के इरादे से इनकी खरीद-ब्रिकी की अनुमति नहीं दी गई है .


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