इंदौर  व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच का विरोध करने के लिए मध्य प्रदेश की शिवराज ने एक करोड़ 25 लाख रुपए खर्च किए हैं। यह दावा एनजीओ ट्रांसपैरंसी इंटरनैशनल का है। ट्रांसपैरंसी इंटरनैशनल के इंडिया चैप्टर के सदस्य अजय दूबे ने कहा कि सरकार ने सीबीआई जांच की याचिका के विरोध के लिए सीनियर अधिवक्ता खड़े किए। उनकी फीस देने में ही ये पैसे खर्च हुए हैं।
व्यापम घोटाला: सीबीआई ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 40...

अजय दूबे ने आरोप लगाया कि 2013 से 2015 के बीच नियमों को ताक पर रख सरकार ने सीनियर वकील रखे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के अधिवक्ता केस देख ही रहे थे, तो ऊंची फीस पर सीनियर अधिवक्ताओं को रखने की क्या जरूरत थी।

राज्य के कानूनी विभाग से मिली जानकारी का हवाला देते हुए अजय दूबे ने कहा कि सीनियर अधिवक्ताओं को तभी नियुक्त किया जा सकता है जब सरकार के अधिवक्ता केस लड़ने से इनकार कर दें। अजय दूबे ने कहा कि वे इस मामले को पीएमओ और केंद्रीय कानून मंत्री के सामने रखेंगे।

देश के सबसे चर्चित घोटालों में से एक व्यापम जब सामने आया था तब प्रदेश की बीजेपी सरकार ने इसकी सीबीआई जांच कराने का विरोध किया था। तर्क था राज्य सरकार द्वारा बनाई स्पेशल टास्क फोर्स जांच सही दिशा में कर रही है।

बाद में जब इस केस से जुड़े लोगों की रहस्यमयी मौत होने लगी तो काफी बवाल मचा। इसके बाद सीबीआई जांच के लिए सरकार तैयार हुई। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। साभार: नवभारत टाइम्स

 


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