लखनऊ लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक प्रफेसर को JNU के छात्र उमर खालिद के लिए फेसबुक पर समर्थन दिखाना महंगा पड़ा है। गुरुवार को उनके फेसबुक पोस्ट को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रफेसर अपूर्वानंद द्वारा उमर खालिद क...समाजशास्त्र विभाग के प्रफेसर राजेश मिश्रा ने मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रफेसर अपूर्वानंद द्वारा लिखा गया, ‘उमर खालिद, माय सन’ नाम के लेख से कुछ अंशों को अपने फेसबुक पर साझा किया था। यह लेख एक राष्ट्रीय समाचारपत्र में 23 फरवरी को छपा था। इस पोस्ट को लेकर मिश्रा ने लिखा कि यह राजनैतिक विचारधारा में अंतर के बावजूद अभिव्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन करने के लिए है।

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मिश्रा द्वारा इस लेख को फेसबुक पर साझा किए जाने पर यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को आपत्ति हुई। इन छाभों ने मिश्रा के खिलाफ नारेबाजी की और यूनिवर्सिटी परिसर में उनका पुतला फूंका। बताया जा रहा है कि ये छात्र अखिल भारतीय विधार्थी परिषद (ABVP) से ताल्लुक रखते हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मिश्रा के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें इसका जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि वह मिश्रा के जवाब के बाद ही ‘आगे की कार्रवाई’ तय करेगा। उधर, एसएफआई और एआईएसए छात्रसंघ के छात्रों ने शहर में JNU के छात्रों के समर्थन में जो रैली निकाली थी, वह प्रफेसर मिश्रा के लिए समर्थन जताने में तब्दील हो गई।

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मिश्रा का यह फेसबुक पोस्ट वॉट्सऐप पर वायरल हो गया। इसका स्क्रीनशॉट लेकर ABVP के कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रफेसर मिश्रा आग में घी डालकर विवाद भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी के उपकुलपति एस.बी. निमसे को भेजे गए एक ज्ञापन में ABVP ने प्रफेसर मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की हैं। संगठन के सदस्य अनुराग तिवारी कहते हैं, ‘वह देशद्रोही हैं। जब वह यूनिवर्सिटी परिसर में आंएगे, तो मैं जूतों का हार पहना कर उनका स्वागत करूंगा।’

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विरोध के बीच, मिश्रा ने एक और पोस्ट लिखकर फेसबुक पर अपनी सफाई दी है, ‘हालांकि मैं खुद अफजल गुरु के कट्टर विचारों के समर्थन में और पाकिस्तान के समर्थन व भारत को टुकड़ों में बांटने के लिए की गई किसी भी तरह की नारेबाजी के बिल्कुल खिलाफ हूं, लेकिन मैं इस बात के पक्ष में हूं कि उन छात्रों को अपराधी घोषित करने में हमें हर तरह से सावधानी बरतनी चाहिए। उनके विचार को सद्भावना से सुना जाना चाहिए, वरना उनकी पूरी जिंदगी और उनका भविष्य दांव पर लग जाएगा।’ (नवभारत टाइम्स)


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