जयपुर: कोचिंग हब कहे जाने वाले राजस्थान के शहर कोटा में छात्रों के आत्महत्या करने की बढ़ती घटनाओं पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से छात्रों के आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अजित सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य के चीफ सेक्रटरी, प्रिंसिपल सेक्रटरी, डीजीपी और कोटा के कलेक्टर-एसपी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि आखिर देश भर में कोचिंग हब के तौर पर जाना जाने वाला कोटा सूइसाइड हब क्यों बन गया है।

पिछले साल कोटा में कोचिंग लेने वाले 19 छात्रों ने परीक्षाओं में असफल होने या कम अंक आने पर मौत को गले लगा लिया था। कुछ दिनों पहले ही 14 साल के एक किशोर ने अपनी जान दे दी थी। कोटा में मौत को गले लगाने वाला वह सबसे कम उम्र का छात्र था। छात्र की ओर से सूइसाइड का यह मामला कोटा जिला प्रशासन की ओर से ‘मस्ती की पाठशाला’ कैंपेन चलाने के ठीक एक दिन बाद सामने आया। इस अभियान के तहत प्रशासन छात्रों से तनाव मुक्त रहने की अपील कर रहा है।

दिसंबर 2015 में ही डॉक्टरी की तैयारी कर रहे 18 वर्षीय छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते पांच सालों में कोटा के विभिन्न संस्थानों मे पढ़ाई कर रहे 78 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। इनमें से अधिकतर स्टूडेंट्स ने फेल होने के भय से मौत को गले लगा लिया। साभार: नवभारत टाइम्स


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