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बंगाल में अंग्रेजों द्वारा स्थापित आलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने कुलपति के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर विरोध का एक अलग ही तरीका अपनाया हुआ हैं. पिछले दो सप्ताह से कुलपति का विरोध कर रहे छात्र नफल रोज़ा रख सामूहिक रूप से इफ्तार भी कर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शासित आलिया विश्वविद्यालय एक एक मात्र मुस्लिम शैक्षणिक संस्था है. इसमें अध्ययन करने वाले छात्रों का ताल्लुक अधिकतर मुस्लिम समुदाय से हैं. 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद विश्वविद्यालय के बजट में फंड की कोई कमी नहीं रही. इसके बावजूद छात्रों की समस्याओं की और ध्यान नहीं दिया जा रहा.

छात्रों का आरोप हैं कि यूनिवर्सिटी में फेकल्टी टीचरों की संख्या आधे से भी कम है जिसकी वजह से रोजर हाट परिसर में इंजीनियरिंग, विज्ञान और एमबीए की लगने वाली क्लासेज पूरी तरह से ठप है. पिछले दो सप्ताह से इंजीनियरिंग के छात्र अपनी 22 सूत्रीय मांग को लेकर धरने पर बेठे हुए लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की और से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा.

छात्रों का आरोप हैं कि यूनिवर्सिटी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैला हुआ हैं. टैंडर निकाले बिना अपनी पसंदीदा कंपनियों को ठेका दे दिया जाता हैं. कुलपति अपने पद का दुरुपयोग कर तानाशाह बन चुके हैं. इंजीनियरिंग, एमबीए और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय होने के बावजूद कुलपति छात्रों की बंद क्लासेस की और ध्यान नहीं  दे रहे हैं.


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